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92 साल के अच्युतानंदन ने दिखाया कमाल, केरल ने कहा लाल-सलाम

Thu, 19 May 2016 05:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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अच्युतानंदन ने दिखाया कमाल, केरल में लाल सलाम-लाल सलाम - फोटो : PTI
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92 साल के 'युवा' वेलिक्ककतु शंकरन (वीएस) अच्युतानंदन ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है। अपने अनुभव से उन्होंने एक बार फिर केरल में वामपंथी गठबंधन एलडीएफ को जीत का स्वाद चखाने के साथ-साथ पूर्ण बहुमत भी दिला दिया है। राजनीति के मैदान में 92 साल के अच्युतानंदन की रणनीति, जोश और चुनावी गणित कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही नहीं पकड़ पाई। कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बुजुर्ग नेताओं में शामिल अच्युतानंदन ने एलडीएफ गठबंधन के लिए केरल विधानसभा चुनाव में प्रचार में पूरी ताकत झोंकी। 92 साल की उम्र में लगभग राज्य के हर प्रमुख हिस्‍से तक पहुंचे और करीब 70 रैलियों को संबोधित किया। रोजाना उन्‍होंने औसत 200 किमी की यात्रा की।
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इसी के बदौलत एलडीएफ का केरल में पूर्ण बहुमत के साथ-साथ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। वहीं कांग्रेस गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 30 फीसदी वोट मिल पाए हैं। वहीं इन चुनावों में पूरा जोर लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी 10 फीसदी से कुछ ज्यादा ही वोट जुटा पाई। अंतिम चुनावी परिणाम आने पर चुनावी समीकरण में कुछ बदलाव हो सकता है।

केरल विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है। केरल मे सोलर घोटाला, शराब घूसकांड जैसे मामले कांग्रेस के गले की फांस बन गए। इस घोटाले की आग में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी तक को घेर लिया। इसके बाद एलडीफ ने इन्हीं मुद्दों को उठाकर यूडीएफ को घेर लिया।
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माकपा के वरिष्ठ नेता व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने चुनावी भाषणों में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला बोलते हुए एलडीएफ की तरफ से चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी। अच्युतानंदन ने कांग्रेस की अगुआई वाले सत्ताधारी यूडीएफ और भाजपा-बीडीजेएस गठबंधन पर करारा हमला बोला था। अच्युतानंदन खुद तीसरी बार मलमपुझा विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरे।

ओमेन चांडी की अगुआई वाली यूडीएफ सरकार पर हमला बोलते हुए अच्युतानंदन ने आरोप लगाया था कि लोकायुक्त के पास मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के खिलाफ लंबित पड़े सारे मामले ही इस बात के सुबूत हैं कि सरकार में भ्रष्टाचार जड़ें जमाए बैठा है।

चुनाव की घोषणा से ठीक पहले मार्च में सरकार की ओर से जारी विवादित जमीन के आवंटन आदेश का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने अच्युतानंदन आरोप लगाया कि कुल 2,820 एकड़ जमीन कुछ कारपोरेट घरानों को देने का आरोप लगाया था।

पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तरफ से की गई चुनावी रैलियों के बावजूद केरल में भाजपा कोई खास कमाल नहीं कर पाई। चुनावी रैलियों में एनडीए पर निशाना साधते हुए अच्युतानंदन ने भाजपा पार्टी पर आरोप लगाया था कि वह केरल में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) की ओर से संचालित लघु वित्त योजना में अनियमितताएं पाई गई थीं। एसएनडीपी से जुड़ी राजनीतिक पार्टी भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) राज्य में एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी साझेदार है। 

कम्युनिस्‍ट पार्टी को स्‍थापित किया
अच्युतानंदन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के संस्थापक नेताओं में से एक हैं। केरल राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं को तैयार करने में भी उनकी अहम भूमिका रही है। केरल के अलपुझा जिले में 20 अक्‍टूबर 1923 को अच्युतानंदन का जन्‍म हुआ। उनका बचपन संघर्ष में ही गुजरा। चार साल की उम्र में ही वीएस अच्युतानंदन की मां का निधन हो गया और 11 तक पहुंचते-पहुंचते पिता भी चल बसे।

नतीजा यह हुआ कि सातवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़कर टेलरिंग के काम में बड़े भाई का हाथ बंटाना पड़ा। जीवन यापन के लिए चल रहे इस संघर्ष के बीच वे राजनीतिक तौर पर भी सक्रिय रहे। केरल में जमीन को लेकर चले आंदोलन में उनकी भूमिका ने राजनीति और आम लोगों के बीच उनकी छवि को एक नए स्तर पर पहुंचाने का काम किया।
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