हालांकि कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। भाजपा के नेता संजय बालियान ने कहा, ‘मैं अदालत की प्राथमिकता से आश्चर्यचकित हूं। मेरा मत है कि राम मंदिर बनना चाहिए और सरकार को इसके लिए सभी संभावनाएं तलाश करनी चाहिए।’
आरएसएस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राम जन्मभूमि विवाद पर जल्द फैसला देना चाहिए और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण की राह में कोई बाधा हो तो उसे दूर करने के लिए कानून लाना चाहिए। संघ के मुख्य प्रवक्ता अरुण कुमार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्वीकार किया था कि वह स्थल भगवा राम की जन्मभूमि है और वहां पहले मंदिर था।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनंत काल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अगर सरकार कानून बनाने में असफल रहती है तो अगले साल प्रयागराज कुंभ में होने वाले धर्म संसद में साधु संत इस पर रणनीति बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर आजादी के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन है और इससे हिंदू-मुस्लिम समीकरण प्रभावित हो रहा है। पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत भी विजया दशमी के मौके पर मंदिर के लिए कानून बनाने की बात कह चुके हैं।
भाजपा से रिश्ते में कड़वाहट रखने वाली उसकी सहयोगी शिव सेना ने कहा है कि कोर्ट राम मंदिर मामले में कुछ नहीं करेगा। शिव सेना नेता संजय राउत ने फैसले पर कहा, ‘राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है, उसने कौन सी तारीख दी, हम इस पर ध्यान नहीं देते और न ही देना चाहते हैं। इस मसले पर कोर्ट कुछ नहीं करेगा।’ राउत ने कहा कि हमने 25 साल पहले बाबरी ढांचा ढहाने से पहले कोर्ट से नहीं पूछा था। हम चाहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बने। हम पाकिस्तान में राम मंदिर बनाने की मांग नहीं करते।
मंदिर पर एनसीपी व शिव सेना में वाक युद्ध
मंदिर निर्माण को लेकर शिव सेना और एनसीपी में शब्द युद्ध तेज हो गया है। शरद पवार के भतीजे राजेंद्र के बेटे ने मंदिर मुद्दे पर अजित पवार की आलोचना पर शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया है।
दरअसल शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पिछले हफ्ते कहा था कि उद्धव ठाकरे अपने पिता बाल ठाकरे के नाम पर एक स्मारक तक तो बनवा नहीं पाए और अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की ‘बीन’ बजा रहे हैं। शिव सेना ने इसका अपने मुखपत्र सामना में जवाब देते हुए अजित पवार को ‘गटर का कीड़ा’ बता दिया।
उधर भाकपा नेता डी राजा और सुधाकर रेड्डी ने कहा है कि यह मामला अभी विचाराधीन है और भाजपा नेता अध्यादेश के जरिये मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी तानाशाही व्यवस्था में नहीं रहते और लोकतांत्रिक संस्थानों को भाजपा नेताओं के बयानों का संज्ञान लेना चाहिए। सरकार को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।