लखनऊ के विवेक तिवारी शूटआउट मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस के महानिदेशक से जांच रिपोर्ट तलब की है। साथ ही यूपी के पुलिस प्रमुख को नोटिस भी जारी किया गया है। एपल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की सितंबर में लखनऊ के गोमती नगर में देर रात सिपाही प्रशांत चौधरी ने कथित तौर पर गोली मार कर हत्या कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील और सामाजिक कार्यकर्ता राधाकांता त्रिपाठी ने विवेक तिवारी फेक एनकाउंटर मामले में याचिका दायर की है। त्रिपाठी की याचिका पर मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से चार हफ्तों के भीतर अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। त्रिपाठी ने अपनी याचिका में लिखा है कि इस मामले में पुलिस की क्रूरता मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल उठाती है।
अपनी याचिका में आयोग से अनुरोध किया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपनी टीम भेज कर ऐसे गंभीर मामलों की जांच करे। साथ ही, मांग की है कि राज्य सरकार विवेक तिवारी की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और मैजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट के अलावा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराए। वकील त्रिपाठी ने विवेक तिवारी के परिजनों को पचास लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।