विस्तारा एयरलाइंस पर खाने को लेकर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगा है। दरअसल पत्रकार आरती सिंह टिक्कू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल हो गया है। आरती टिक्कू सिंह ने एक पोस्ट में विस्तारा एयरलाइंस को टैग करते हुए लिखा कि 'उनकी फ्लाइट पर क्यों शाकाहारी खाने को 'हिंदू भोजन' और मांसाहारी खाने को 'मुस्लिम भोजन' कहा जा रहा है?'
पत्रकार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उठाए सवाल
पत्रकार ने लिखा कि 'आपको किसने बताया कि सभी हिंदू शाकाहारी हैं और सभी मुस्लिम मांसाहारी? आप लोगों पर ये क्यों थोप रहे हैं? आपको किसने ये अधिकार दिया, क्या अब आप सब्जियों, चिकन और यात्रियों को लेकर भी सांप्रदायिकता करेंगे? मैं इस व्यवहार से हैरान हूं इसलिए मैंने आपके आदेश का उल्लंघन करने के लिए दोनों भोजन को बुक किया।' पत्रकार ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारत सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग की।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर अचानक से चर्चा में आ गई और यूजर्स ने इसे लेकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि क्या अब हमारा भोजन भी धर्म के आधार पर तय होगा? यूजर्स ने डीजीसीए को टैग कर तुरंत इस मामले में दखल देने और भोजन को हिंदू या मुस्लिम बताने की प्रैक्टिस को बंद करने की मांग की।
हवाई सेवा विशेषज्ञों ने दिया स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया पर जहां भोजन को सांप्रदायिक बनाने के आरोप लग रहे थे, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने इसका बचाव भी किया और कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया है और बीते 30 वर्षों से बड़ी एयरलाइंस ऐसा करती आ रही हैं। एवियालाज के सीईओ संजय लजार ने पत्रकार के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ये एयरलाइंस के भोजन के कोड हैं और लगभग सभी बड़ी एयरलाइंस में इनका इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर हिंदू भोजन जरूरी नहीं है कि वह शाकाहारी भोजन ही हो, वह मांसाहारी भोजन भी हो सकता है। हिंदू भोजन का मतलब है कि यह हलाल खाना नहीं है। वहीं मुस्लिम भोजन का मतलब है कि यह हलाल है। इसी तरह एयरलाइंस के खाने में एशियाई भोजन, बच्चों का भोजन, जापानी भोजन आदि कोडिंग भी होती हैं।