राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की रोजाना सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अगली तारीख 13 जुलाई तय की है, लेकिन इससे पहले ही हिन्दू संगठनों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि हम अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे, अगर फैसला जल्द नहीं आया तो साधू-संतों की शरण में जाएंगे। साथ ही विहिप ने विपक्ष पर राममंदिर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का भी आरोप लगाया।
शुक्रवार को विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन ने कहा कि हमारा सुप्रीम कोर्ट से निवेदन है जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई हो और जल्दी फैसला दे। उन्होंने कहा कि राम विरोधी इस मामले को लटकाना चाहते हैं, और सुनवाई को 2019 के बाद ले जाना चाहते हैं, लेकिन जल्द सुनवाई हिन्दू समाज का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि अब अदालत जो भी फैसला देगी सबूतों के आधार पर देगी, नए सिरे से खुदाई कराएंगे नहीं, नए सबूत नहीं खोजे जाएंगे और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर ही बहस होगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर हम 500 साल से धैर्य रख रहे हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम अगस्त तक प्रतीक्षा करेंगे और माहौल का इंतजार करेंगे, अगर उसके बाद भी कुछ नहीं होता है, तो संतों की उच्चाधिकार समिति जो फैसला करेगी, वह मानेंगे।
गौरतलब है कि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने दावा किया था कि सितंबर माह के अंत तक राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला आ जाएगा। और तब तक संगठन इंतजार की मुद्रा में रहेगा और फैसला आने के पहले न संगठन कुछ कर सकता है और न ही सरकार क्योंकि न्यायालय के प्रतिबंध से सभी बंधे हैं।
वहीं, जैन ने कहा कि राम विरोधी अगर यह आरोप लगाते हैं कि विहिप राम मंदिर मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है, तो यह सरासर गलत है। उन्होंने उलटे राम विरोधियों पर ही इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। जैन ने कहा कि वे यह आरोप हम पर नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट पर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हमारे कहने से तय नहीं की है, बल्कि अपने शिड्यूल के हिसाब से तय की है। उन्होंने विपक्ष पर ही उंगली उठाते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझ कर 2019 में फैसले को लटका कर इसका राजनीतिकरण करना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष राम मंदिर के बहाने पूरे मुस्लिम समाज को लामबंद करना चाहता है, जिसके चलते वे इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।