चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने माहेश्वरी को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अदालत मामले का परीक्षण करेगी। माहेश्वरी की ओर से वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने एक वायरल वीडियो मामले में व्यक्तिगत उपस्थिति नोटिस को रद्द करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर शुक्रवार को ट्विटर इंडिया के पूर्व प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी से जवाब मांगा है। यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा माहेश्वरी के खिलाफ जारी नोटिस को रद्द करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।
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चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने माहेश्वरी को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अदालत मामले का परीक्षण करेगी। माहेश्वरी की ओर से वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए थे। मेहता ने अपनी दलील में कहा कि इस मामले में कानून का सवाल है जिसकी जांच की जरूरत है। यह हाईकोर्ट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मसला है।
यूपी सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 23 जुलाई के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है जिसमें नोटिस को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में लोनी पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी में माहेश्वरी को गिरफ्तारी से सुरक्षा भी प्रदान की थी।
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गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर के एमडी को नोटिस जारी कर उनसे मारपीट के वायरल वीडियो की जांच के लिए लोनी पुलिस थाने में पेश होने को कहा था। ट्विटर इंडिया के अधिकारियों ने पुलिस को सूचित किया था कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ के लिए उपलब्ध होने के लिए तैयार हैं, जिसे पुलिस ने खारिज कर दिया था।