विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस. उन्नीकृष्णन नायर (फाइल फोटो)
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विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर ने अंतरिक्ष मिशन में तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने पर खुलकर बोला है। उन्होंने गुरुवार को कहा, ऐसे समय में जब कई देशों का लक्ष्य मंगल ग्रह पर बस्तियां बसाना है, उस वक्त भारत के अंतरिक्ष मिशन को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है, जिसके लिए तकनीकी क्षमता पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने कार्यक्रम में कहा, अब नासा समेत शीर्ष देशों के अंतरिक्ष मिशन इसरो के साथ ज्यादा जुड़ाव के इच्छुक हैं। मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में चुनौतियों के मुद्दे पर बोलते हुए कहा, कई देश मंगल ग्रह पर स्थायी निवास बनाने जा रहे हैं और हमें यह साबित करना चाहिए कि हम अपनी प्रौद्योगिकियों के साथ भी तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र इस पर भी काम कर रहा है कि अंतरिक्ष पर्यटन के लिए प्रौद्योगिकियों को कैसे वितरित किया जा सकता है क्योंकि अधिक निजी एजेंसियों ने अंतरिक्ष पर्यटन और अंतरिक्ष में रुचि दिखाई है।भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स की क्षमता अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा, मंगल एक आशाजनक ग्रह है जिसका वातावरण बहुत पतला है (पृथ्वी का सौवां हिस्सा) और दिन और रात की संख्या 24 घंटे है, इसका भूभाग पहाड़ी है और यह पृथ्वी के समान है।
अंतरिक्ष अभियानों में चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, शून्य गुरुत्वाकर्षण और विकिरण स्थितियों से बचना और जैविक लय, भारहीनता और मनोवैज्ञानिक मुद्दों से निपटना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, किसी भी अन्य तकनीक की तरह बायोएस्ट्रोनॉटिक्स में अंतरिक्ष कार्यक्रमों में बहुत बड़ी गुंजाइश है