उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदमों की सराहना करते हुए कहा है कि प्रौद्योगिकी ने वास्तव में शासन को लोकतांत्रिक बना दिया है। इसके कारण शासन अधिक जवाबदेह हो गया है। उन्होंने कहा कि सॉफ्ट पावर से सॉफ्टवेयर शक्ति में भारत का यह परिवर्तन पूरे विश्व के कल्याण के लिए है। यूनेस्को भारत-अफ्रीका हैकथॉन में अपने समापन भाषण में उन्होंने ये बातें कहीं।
इस सम्मेलन में बोलते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत बेहद तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और इस दशक के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकते हैं। इसे हासिल करने की दिशा में भारत ने डिजिटल आधारित ई गवर्नेंस की क्षमता का दोहन किया है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत ने तेजी से पारदर्शी-जवाबदेह तरीके से त्वरित और कुशल सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया, भारत की विनिर्माण क्षमता से परिचित हुई। दुनिया भर के देशों ने देखा कि संकटकाल में भारत ने अन्य देशों को टीके, दवाएं और अन्य उपकरण प्रदान किए। महामारी के चुनौतीपूर्ण समय के दौरान हमारी आत्म निर्भर रणनीति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने और बहाल करने में मदद की।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का प्रयास केवल निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि विश्व के कल्याण के लिए है। महामारी के बाद अब दुनिया वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए भारत की ओर देख रही है। भारत ने न केवल प्रभावशाली सुधार दर्ज किया है बल्कि दुनिया में निवेश, नवाचार और उद्यमिता के लिए यह सबसे बेहतरीन मार्केट के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत विकासशील देशों की विकासात्मक आकांक्षाओं के बारे में महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाता रहा है। हम विकासशील देशों की प्रगति के लिए समान अवसर और समान अवसरों की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि ये यूनेस्को-भारत-अफ्रीका (यूआईए) हैकथॉन बीते मंगलवार से शुरू हुआ था। इसमें अफ्रीका के 22 देशों के 350 से अधिक छात्रों और भारत के 231 छात्रों ने भाग लिया। इस हैकथॉन में भाग लेने वाले देशों में बोस्तवाना, कैमरून, इक्वेटोरियल गिनी, एस्वातिनी, इथियोपिया, गाम्बिया, घाना, गिनी-बिसाऊ, लेसोथो, टोगो, मलावी, माली, मॉरीशस, मोरक्को, मोजाम्बिक, नामीबिया, नाइजर, केन्या, सिएरा लियोन, तंजानिया, युगांडा और जिम्बाब्वे शामिल हैं।