एक्स पर उप राष्ट्रपति ने कहा, भारत के उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने तीन रिपोर्ट्स के प्रसार और प्रकाशन का निर्देश दिया है- 'भातीय न्याय संहिता, 2023' पर 246वीं रिपोर्ट; 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' पर 247वीं रिपोर्ट; 'भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023' पर 248वीं रिपोर्ट। इन्हें संसद सदस्य (राज्यसभा) बृजलाल और गृह मामलों पर विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष द्वारा 10 नवंबर, 2023 को सौंपा गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय न्याय संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 को 11 अगस्त को संसद के निचले सदन में पेश किया गया था। ये विधेयक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करना चाहते हैं। विधेयकों को पेश करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इन तीन नए कानूनों की आत्मा नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा करना होगा।
उन्होंने कहा, ब्रिटिश काल के कानून उनके शासन को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने के लिए बनाए गए थे और उनका उद्देश्य सजा देना था, न्याय देना नहीं। शाह ने कहा, हम (सरकार) इन दोनों बुनियादी पहलुओं में बदलाव लाने जा रहे हैं। इन तीन नए कानूनों की आत्मा भारतीय नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा करना होगा। इनका उद्देश्य किसी को सजा दिलाना नहीं बल्कि न्याय देना होगा और इस प्रक्रिया में अपराध की रोकथाम की भावना पैदा करने के लिए जहां जरूरत होगी वहां सजा दी जाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीसी की जगह लेने वाले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक में अब 533 धाराएं होंगी। उन्होंने कहा, कुल 160 धाराओं में बदलाव किया गया है, नौ नई धाराएं जोड़ी गई हैं और नौ धाराओं को निरस्त कर दिया गया है।