सोमवार 29 अक्तूबर से राममंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम दौर की सुनवाई शुरू होनी है। लेकिन इसके बाद भी इस मामले पर कोर्ट का फैसला कब तक आएगा, कहा नहीं जा सकता। इसी बात को ध्यान में रखकर विहिप मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने पर जोर दे रही है। कानून बनाने के लिए सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी, इसके लिए विहिप नवंबर माह में विशेष अभियान चलाने जा रही है।
इस अभियान के तहत विहिप के नेता देश के सभी संसदीय क्षेत्रों में जनता से संपर्क करेंगे और जनता के साथ उस क्षेत्र के सांसदों से मुलाकात कर राममंदिर के लिए उनका लिखित समर्थन मांगेंगे। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) इस समय भी राममंदिर पर सबकी सहमती पाने की कोशिशों में जुटा है। अक्तूबर महीने में ही विहिप के पदाधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के राज्यपालों से मुलाकात कर उनसे राममंदिर के लिए समर्थन मांगा है। यह सिलसिला अब भी जारी है।
दरअसल, 31 जनवरी और एक फरवरी को प्रयागराज में धर्म संसद का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी भाग लेने वाले हैं। लगभग यही समय होगा जब देश की मौजूदा संसद अपने कार्यकाल के अंतिम सत्र के लिए बैठक करेगी। इसलिए विहिप की कोशिश है कि उस समय तक इस मुद्दे पर सभी पार्टियों का रुख स्पष्ट हो जाए। जिससे ज्यादातर सांसदों के समर्थन होने की बात रखकर अमित शाह पर संसद में कानून लाने के लिए दबाव डाला जा सके।
विहिप के एक नेता के मुताबिक सिर्फ उनका संगठन ही नहीं, बल्कि अनेक लोग ऐसे हैं जो राममंदिर निर्माण के लिए इसे अंतिम मौके के रूप में देख रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि अगर राममंदिर का निर्माण इस समय भी नहीं हो सका तो शायद यह कभी नहीं बन पायेगा। इसी के मद्देनजर सबकी कोशिश मौजूदा सरकार में ही मन्दिर निर्माण के लिए कानून बनाने की है।
विश्व हिन्दू परिषद् के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेन्द्र जैन ने अमर उजाला को बताया कि अब यह साफ हो गया है कि मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने के आलावा कोई विकल्प शेष नहीं बचा है। और कानून सांसदों के समर्थन से ही बनना है, इसलिए वे सभी पार्टियों के सांसदों से मिलकर उनसे कानून बनाने में उनके समर्थन की अपील करेंगे।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह देश सबका है और भगवान राम भी सबके हैं, इसलिए उनका मानना है कि अपनी दलगत विचारधारा को अलग रखकर सभी को इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल इसमें किसी दल विशेष के श्रेय लेने की बात करता है तो उनकी मांग होगी कि वो खुद इस मसले पर अपना बिल संसद में प्रस्तावित करे और वे भाजपा सहित सभी दलों से उनके बिल के समर्थन की मांग करेंगे। जैन ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद के अगले सत्र में राममंदिर निर्माण का कानून बन जाएगा।