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अयोध्या में राम मंदिर का गर्भगृह तो विवादित स्थल पर ही बनेगा : विहिप

Wed, 30 Jan 2019 08:16 PM IST
Nilesh Kumar शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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ram mandir - फोटो : amar ujala
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अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का गर्भगृह विवादित स्थल पर ही बनेगा। विश्वहिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन का कहना है कि विश्व हिन्दू परिषद, राम जन्मभूमि न्यास दोनों विवादित स्थल से अपना दावा नहीं छोड़ सकता। 
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सुरेन्द्र जैन के अनुसार राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और विवादित स्थल से लेकर आस-पास की भूमि राम जन्मभूमि है। वहां भव्य मंदिर ही बनेगा। राम मंदिर कब बनेगा, क्या होगा, आगे विहिप क्या कदम उठाएगी जैसे सवालों पर सुरेन्द्र जैन कहते हैं कि 31 जनवरी को धर्म संसद की बैठक हो रही है। इसका नतीजा आ जाने दीजिए।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि किसी को विवादित स्थल(बाबरी मस्जिद के ढांचे वाला स्थान) को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए। इस पर हमारा शुरू से (1984) दावा रहा है, आज है और कल भी रहेगा। केन्द्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत भूमि को सुप्रीम कोर्ट से पक्षकारों को देने की पहल का जैन ने स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि इससे राम मंदिर बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ सकेंगे, लेकिन हमारा दावा विवादित स्थल पर भी बना रहेगा। इस मुद्दे पर भाजपा के प्रवक्ता नलिन कोहली अभी कुछ नहीं कहना चाहते। वह धर्म संसद की बैठक के नतीजे का इंतजार करना चाहते हैं।

सरकार तो केवल कस्टोडियन

सुरेन्द्र जैन का कहना है कि सरकार अधिग्रहीत भूमि की केवल कस्टोडियन है। सरकार या फिर उच्चतम अदालत अधिग्रहण करके रामजन्म भूमि के पास की जमीन को इतने दिन तक बंधक बनाकर कैसे रख सकती है। 

केंद्र सरकार की कोर्ट में दी गई अर्जी एक सकारात्मक कदम है। हम इसका स्वागत करते हैं। विश्व हिन्दू परिषद ने यही मांग पहले भी उच्चतम न्यायालय और केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से की थी। 

क्या किया था नरसिंह राव और चंद्र शेखर ने? 

रामजन्म भूमि स्थल पर 2.67 एकड़ की विवादित स्थल की जमीन समेत आस-पास की कुल 67 एकड़ जमीन को केन्द्र सरकार ने अधिगृहीत लिया था। यह अधिग्रहण पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के समय में 1993 में उनकी पहल पर हुआ था। नरसिंह राव रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का हल निकालना चाहते थे। इसलिए उनके समय में काफी प्रयास हुआ। 

नरसिंह राव सरकार यह प्रयास 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाए जाने के बाद शुरू किया था। कहा जाता है कि नरसिंह राव सरकार और मध्यस्थता के पैरोकार विवादित स्थल(2.67 एकड़) को छोड़कर शेष स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण कराने के पक्ष में थे, लेकिन विहिप समेत अन्य ने इसे नहीं माना। 

इस पक्ष का कहना है कि विवादित स्थल पर ही राम मंदिर का निर्माण होगा। बताते हैं इसके बाद राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद कोई हल नहीं निकल सका। नरसिंह राव सरकार से पहले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर ने भी राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सुलझाने की सकारात्मक पहल की थी। 

पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा समेत अन्य का दावा है कि चंद्रशेखर विवाद सुलझाने काफी करीब तक पहुंच गए थे, लेकिन सरकार का कार्यकाल छोटा होने के कारण सफल नहीं हो सके।

नरसिंह राव से सहमत नहीं है विहिप

विहिप नेता सुरेन्द्र जैन ने कहा कि वह नरसिंह राव सरकार के प्रयास, भूमि अधिग्रहण के प्रयास से सहमत नहीं हैं। जैन का कहना है कि 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिरने के बाद उन्होंने कहा था कि आज बाबरी मस्जिद गिरा दी गई। 

वह बाबरी मस्जिद फिर बनवाएंगे। जबकि विवादित स्थल ही असली राम जन्मभूमि है। सुरेन्द्र जैन का कहना है कि नरसिंह राव का प्रयास संदिग्ध था। इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता था। 
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