राज्यसभा के सभापति एम.वैंकेया नायडू(फाइल फोटो)
राज्यसभा के सभापति एम.वैंकेया नायडू ने संसदीय समितियों की बैठकों में गैरहाजिर रहने वाले सदस्यों को लेकर नाराजगी जताई है। सभापति ने सदन में सदस्यों को जानकारी दी कि संबंधित समितियों के अलावा स्थाई समिति की बैठक भी बुलाई गई है जिसमें इस समितियों के कामकाज में सुधार को लेकर विचार-विमर्श करेंगे।
सदन में नायडू ने बताया कि हाल में संसदीय समितियों का इस साल सितंबर में फिर से गठन किया गया था। अब तक इन समितियों की 41 बैठकें हुई हैं। इन बैठकों के आधार पर जो आंकड़े हैं उसमें मौजूद रहने वालों सदस्यों की संख्या बहुत कम है। नायडू ने बताया कि विभाग संबंधित आठ स्थाई समितियों में अध्यक्ष समेत राज्यसभा के दस और लोकसभा के 21 सदस्य होते हैं।
नायडू ने सदन को बताया कि मैंने सदस्यों की गैरहाजिरी के संबंध में समितियों के अध्यक्षों से चर्चा कर उन्हें आंकड़ों से अवगत कराया है। समितियों की बैठकों में राज्यसभा के 80 में से मात्र 18 सदस्य ही इनमें शामिल हुए। वहीं लोकसभा के 168 में मात्र 18 सदस्य ही इन बैठकों में शामिल हुए। सभापति ने सदन में उन सदस्यों के नाम बताए जिन्होंने संसदीय समिति की बैठकों में हिस्सा लिया है। सभापति ने समिति के सदस्यों से शतप्रतिशत बैठकों में शामिल होने की अपेक्षा की।
उन्होंने बताया कि समिति का प्रत्येक सदस्य 25 सांसदों का प्रतिनिधित्व करता है। एक सदस्य की गैरहाजिरी पर 25 सदस्यों की आवाज नहीं उठ पाएगी। सभापति ने समिति के सदस्यों से अपील की बैठकों में मौजूदगी के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली सुनिश्चित करें।
उन्होंने बताया कि राज्यसभा की आठ विभागों संबंधी स्थाई समितियों के कुल 248 सदस्यों सौ ने तो दो या दो से अधिक बार बैठकों में हिस्सा भी नहीं लिया। सितंबर से अब तक हुई 41 बैठकों में 23 में तो आधे से कम सदस्य ही पहुंचे। सबसे बुरा हाल गृह मामलों की समिति का है।