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Kerala: छात्र-छात्राओं का कक्षाओं में एक साथ बैठना भारतीय संस्कृति के खिलाफ, हिंदूवादी नेता के बयान पर बवाल

Mon, 29 Aug 2022 11:29 AM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, कोच्चि

सार

कोच्चि में मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए वेल्लापल्ली ने कहा कि एलडीएफ सरकार द्वारा बनाई गई नीति लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए समान वर्दी और स्कूलों में एक साथ पढ़ाया जाना बिल्कुल अनुचित है।
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वेल्लापल्ली नटेसन - फोटो : Madhyamam.com
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विस्तार
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केरल के संख्यात्मक रूप से मजबूत हिंदू एझावा समुदाय के नेता वेल्लापल्ली नटेसन ने कहा है कि लड़कियों और लड़कों का कक्षाओं में एक साथ बैठना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है और यह अराजकता पैदा करता है। रविवार को कोच्चि में मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए वेल्लापल्ली ने कहा कि एलडीएफ सरकार द्वारा बनाई गई नीति लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए समान वर्दी और स्कूलों में एक साथ पढ़ाया जाना बिल्कुल अनुचित है।

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आप ईसाई और मुसलमानों के शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा होते नहीं देख सकते
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बेहद करीबी माने जाने वाले नटेसन ने कहा कि हम कक्षाओं में लड़कियों और लड़कों के एक साथ बैठने के पक्ष में नहीं हैं। हमारी अपनी संस्कृति है। हम अमेरिका या इंग्लैंड में नहीं रह रहे हैं। नेटसन ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति लड़कों और लड़कियों को एक साथ गले लगाने और बैठने को स्वीकार नहीं करती है। आप ईसाई और मुसलमानों के शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा होते नहीं देखते हैं। 

छात्र-छात्राओं का एक साथ बैठना अराजकता पैदा करता है: नटेसन
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं का एक साथ बैठना अराजकता पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश हिंदू कॉलेज में इस तरह की व्यवस्था देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यही एक कारण है कि ऐसे संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से अच्छे ग्रेड या वित्त पोषण नहीं मिलता है।
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18 साल के बाद वे जो चाहें कर सकते हैं: नटेसन
उन्होंने आगे कहा कि 18 साल से कम उम्र के या कॉलेजों में युवा वयस्कों को एक साथ बैठकर एक-दूसरे को गले नहीं लगाना चाहिए जब वे अभी भी पढ़ रहे हों। एक बार जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और परिपक्व हो जाते हैं, तो वे जो चाहें कर सकते हैं, नटेसन ने कहा।  नटेसन ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एलडीएफ सरकार खुद को एक धर्मनिरपेक्ष सरकार कहने के बावजूद धार्मिक दबाव के आगे झुक रही है, और अपने कुछ फैसलों पर देर से नहीं टिकी है।

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