जयपुर की सडक़ों पर दिन हो या रात कोई अपराध करना आसान नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यम से भी आप कोई सनसनी नहीं फैला सकते। ऐसा केवल जयपुर में नहीं है, बल्कि राजस्थान का हर जिला अभय कमान सेंटर के जरिए इसी तरह की सुविधा (सीसीटीवी नेटवर्क कमांड एंड कंट्रोल) से लैस हो रहा है। 10 हजार के करीब गांव पंचायतें ई-मित्रा से तो भामाशाह कार्ड के जरिए दूर दराज के रेगिस्तान में टीले पर बसे गांवों से लेकर शहर तक को लोगों के अधिकार, दवा, शिक्षा, राशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति से लेकर काफी कुछ बस एक क्लिक में उपलब्ध है।
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री
वसुंधरा राजे का दावा है कि उनकी पहल पर दुनिया के किसी भी कोने से राजस्थान को कनेक्ट करने का सपना अपना असर दिखाने के लिए तैयार है। जुलाई 2018 के आखिरी दिन 30 छात्र-छात्राओं को अमेरिका ले जाने के लिए चयनित किया गया है। ये छात्र सिलिकॉन सिटी जाएंगे। 15 अगस्त तक रहेंगे और वहां की सूचना तकनीक की दुनिया को देखकर राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश को नई ऊंचाई पर ले जाने का जज्बा पालेंगे। खास बात यह भी इसके लिए सामान्य घरों के इन छात्रों को एक पाई की कीमत भी नहीं देनी है। खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसे बड़ी उपलब्धि मान रही हैं।
वसुंधरा का कहना है कि राजनीति होती रहती है, सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन उन्हें खुशी है कि पिछले पांच साल में उन्होंने राजस्थान को गडढे(बिमारू राज्य) से निकाल कर विकास की एक्सप्रेस पर दौड़ाया है। राजस्थान को डिजिटल बनाया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के शब्दों में
भारत सरकार का डिजिटल इंडिया कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन उनका राज्य इसमें कई कदम आगे निकल चुका है। जब केंद्र सरकार आधार कार्ड की तैयारी कर रही थी, तब उनकी सरकार ने जनता तक सुविधाओं को पहुंचाने के लिए भामाशाह कार्ड योजना को उनतक पहुंचाना शुरू कर दिया था। शहरों में जब निगरानी की जरूरत समझी जा रही थी, तब राजस्थान सरकार अभय कमान सेंटर के जरिए लोगों को सुरक्षित जीवन देने की पहल कर रही थी।
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राजस्थान के प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी अखिल अरोड़ा के अनुसार इस समय देश में बेरोजगारी पर चर्चा हो रही है, लेकिन हम पूरे राजस्थान में ऑन लाइन रोजगार मेला का आयोजन कर रहे हैं। युवा खुद राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित डिजिफेस्ट में आ रहे हैं। हैकथॉन में हिस्सा ले रहे हैं और नामी कंपनियों में नौकरी का नियुक्ति पत्र लेकर जा रहे हैं। यही पंजीकरण हो रहा है और यही उन्हें रोजगार मिल रहा है। अखिल अरोड़ा बताते हैं कि हमने तकनीक और योजनाओं के बीच में तालमेल बिठाया है। तकनीक को लोगों तक पहुंचाकर उन्हें सरकार से सीधे जोड़ा है। ताकि बीच में भ्रष्टाचार, अनावश्यक विलंब और लोगों को होने वाली परेशानी को दूर कर सकें। उन्हें सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े।
हम केंद्र से आगे हैं
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का दावा है कि वह लोगों को सहूलियत देने में केंद्र की योजनाओं से काफी आगे चल रही हैं। उनका कहना है कि राजस्थान ने सभी सरकारी योजनाओं का एक आईटी बेस्ड प्लेटफार्म तैयार कर लिया है। इससे राज्य की जनता सीधे जुडक़र लाभ उठा रही है। उनके राज्य में लोग गांव पंचायतों में जाते हैं और उन्हें अपनी सामान्य जरूरत के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता। अखिल अरोड़ा के अनुसार केंद्र सरकार आयुष्मान भारत की योजना बना रही है, लेकिन राज्य सरकार लोगों को स्वास्थ्य बीमा योजना से जोड़ चुकी है। करीब 4.5 करोड़ लोग इससे जुड़ चुके हैं।
16 लाख लोगों ने इसका लाभ ले लिया है। 370 करोड़ रुपये की राशि सरकार ने बीमा कंपनियों को प्रीमियम के रूप में अदा किया है और बीमा कंपनियों ने 650 करोड़ रुपये लोगों के इलाज के एवज में अस्पतालों को दिए हैं। यह तीसरा साल है, जहां लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। इस बीमा का प्रीमियम भी सरकार ही देती है, लोगों को मुफ्त में सरकारी अथवा निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ मिलता है। पांच करोड़ से अधिक भामाशाह कार्ड बन चुके हैं। बैंक अकाऊंट खुले हैं और लोगों को दी जाने वाली पेंशन, छात्रवृत्ति, सब्सिडी सब सीधे उनके खाते में जा रही है।