वसुंधरा राजे सरकार विरोधी लहर को सुनना हो तो जयपुर से लेकर बीकानेर कहीं भी खड़े हो जाइए। राज्य सरकार के अधिकारी से लेकर स्थानीय तक 10 में छह सरकार के साथ नाराजगी बताते मिलेंगे। तीन लोगों को इस तरह का कुछ नहीं लग रहा है और एक व्यक्ति कुछ न कह पाने की स्थिति वाला मिलेगा। बीकानेर के पंचायती राजस्व विभाग के अफसरों का भी कहना है कि राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। एक नारा भी खूब चल रहा है। एट पीएम नो सीएम। यानी आठ बजे रात के बाद मुख्यमंत्री नहीं मिलती।
वहीं वसुंधरा सरकार के कुछ अफसर इसे राज्य सरकार के लिए 2013 वाली स्थिति बताते हैं। उनका कहना है कि जैसे शीला दीक्षित ने दिल्ली में खूब काम किया और उनकी सरकार केन्द्र की मनमोहन सरकार के घोटालों, नाकामियों के कारण हार गई, वही स्थिति राजस्थान में भी है। यहां जनता इसके चलते वसुंधरा राजे से नाराज है।
मोदी तुझसे बैर नहीं
यह भी एक दृश्य है। झुनझुनू में लगा नारा बीकानेर तक जगह बनाए है। नारा है वसुंधरा तेरी खैर नहीं, मोदी तुझसे बैर नहीं। यानी लोग वसुंधरा राजे सरकार से तो नाराज हैं, लेकिन मोदी सरकार से कोई नाराजगी नहीं है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट बहुत कम हुई है। यह पूछने पर कि क्या प्रधानमंत्री की अपील पर लोग वसुंधरा राजे (भाजपा) को वोट देंगे तो अधिकांश लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री के जनता के बीच में आने पर इसकी गुंजाइश बन सकती है। राजस्थान परंपराओं वाला राज्य है। राजशाही और मेहमान की कद्र करता है। लेकिन यह सवाल कि क्या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सत्ता में लौटकर आ रही हैं तो फिर लोगों की सरकार से नाराजगी दिख जाती है।