राव की जमानत व सरेंडर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एसवी कोतवाल की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इसके बाद पीठ ने 83 वर्षीय राव को कुछ और मोहलत दे दी।
एनआईए ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से जोर देकर कहा कि वह पुणे के एलगार परिषद मामले के आरोपी कवि व एक्टिविस्ट वरवरा राव को पुन: मुंबई की तलोजा जेल में सरेंडर करने को कहे। एनआईए ने कहा कि जेल में कई अन्य बुजुर्ग भी हैं, जिन्हें इलाज की जरूरत है। एनआईए के विरोध के बाद भी हाईकोर्ट ने राव को सरेंडर करने की मियाद 7 जनवरी 2022 तक बढ़ा दी।
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राव की जमानत व सरेंडर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एसवी कोतवाल की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इसके बाद पीठ ने 83 वर्षीय राव को कुछ और मोहलत दे दी।
राव को इसी साल फरवरी में हाईकोर्ट ने इलाज के लिए छह माह की अस्थायी जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें 5 सितंबर को सरेंडर करना था, लेकिन उन्होंने जमानत की मियाद बढ़ाने का अनुरोध किया। राव ने कहा कि वह अब भी कई बीमारियों के शिकार हैं। हाईकोर्ट राव की जमानत की मियाद अब तक कई बार बढ़ा चुकी है। यह मियाद आगे इलाज और जांच के लिए बढ़ाई गई थी।
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सोमवार को जब राव के वकील आनंद ग्रोवर ने नानावटी अस्पताल द्वारा सौंपी गई वरवरा राव की मेडिकल जांच रिपोर्ट के जवाब में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, तो एनआईए ने सरेंडर के लिए समय बढ़ाने का विरोध किया।