बसपा सदस्य रितेश पांडे ने नेट निरपेक्षता से संबंधित एक सवाल पूछा था। इस पर वैष्णव ने कहा कि यही सवाल अन्य सदस्यों ने भी पूछा है। इतना ही नहीं, यहां तक कि शब्द भी यही हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि यह बहुत चिंता का विषय है कि कुछ सांसद एक ही तरह के सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को पहले ही अध्यक्ष के सामने लाना चाहते थे।
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नेट निरपेक्षता से संबंधित एक सवाल पूछने पर बवाल
दरअसल, बसपा सदस्य रितेश पांडे ने नेट निरपेक्षता से संबंधित एक सवाल पूछा था। इस पर वैष्णव ने कहा कि यही सवाल अन्य सदस्यों ने भी पूछा है। इतना ही नहीं, यहां तक कि शब्द भी यही हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य मुरलीधरन और विंसेंट एच पाला के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह और प्रियंका चतुर्वेदी ने भी यही सवाल पूछा था।
यह बहुत चिंता का विषय
पांडेय के सवाल पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा कि यह बहुत चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने इसे अध्यक्ष ओम बिरला के संज्ञान में लाने की मांग की। इस पर पांडे ने कहा कि अगर एक ही सवाल तीन से चार सदस्यों द्वारा पूछा जाता है तो इस पर चर्चा करने की अधिक संभावना होती है। इसलिए सदस्य सवालों को साझा करते हैं और यह नियमों के अनुसार हो रहा है।
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भारत में नेट निरपेक्षता का सिद्धांत...
इस बीच, ओटीटी (ओवर द टॉप) इकाइयों से नेटवर्क उपयोग शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में वैष्णव ने कहा कि भारत में नेट निरपेक्षता का सिद्धांत अच्छी तरह से स्थापित है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए के कार्यकाल में दूरसंचार क्षेत्र, खासकर बीएसएनएल की हालत खराब हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में दूरसंचार क्षेत्र उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है।