केंद्रीय पैनल- सीपीसीएसईए ने आवारा कुत्तों पर वैक्सीन का परीक्षण करने संबंधी सर्कुलर वापस ले लिया है। एक साल से अधिक समय पहले जारी इस सर्कुलर को वापस लेने का मतलब है कि फिलहाल अवारा कुत्तों पर टीकों का ट्रायल नहीं किया जाएगा।
कुत्तों के इस्तेमाल पर क्या थी केंद्रीय पैनल की सिफारिश
दरअसल, सीपीसीएसईए ने पिछले साल सितंबर में सिफारिश की थी कि "आवारा कुत्तों का इस्तेमाल नए टीकों के परीक्षण के दौरान किया जा सकता है। इस केंद्रीय पैनल का मानना था कि टीकों के इस्तेमाल के दौरान पेश आने वाले चुनौतियों के अध्ययन के दौरान भी आवारा कुत्तों का प्रयोग किया जा सकता है।"
पशुओं पर टीकों का परीक्षण ठीक नहीं, पेटा ने बताया कारण
पशु अधिकार संस्था- पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) ने सीपीसीएसईए के फैसले की आलोचना की थी। पेटा ने सरकारी पैनल को चेतावनी दी थी कि उसकी सिफारिश न केवल आवारा कुत्तों के लिए बल्कि प्रयोगों में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य जंगली जानवरों के लिए भी द्वार खोल देगी। सीपीसीएसईए के फैसले के बाद पेटा ने कहा था कि मेडिकल विकल्पों का इस्तेमाल करने पर बड़ी संख्या में जीवों को दर्दनाक प्रभाव, विषाक्तता परीक्षण और विच्छेदन से गुजरना पड़ सकता है।
एक साल के बाद सर्कुलर अगले आदेश तक वापस
पेटा के पुरजोर विरोध के बीच एक साल से अधिक समय बाद, सीपीसीएसईए ने करीब एक हफ्ते पहले- 5 अक्टूबर को नया परिपत्र जारी किया। इसमें कहा गया है कि सर्कुलर को अगले आदेश तक वापस ले लिया गया है।
सर्कुलर वापस लेने के लिए सीपीसीएसईए की सराहना
पेटा इंडिया में विज्ञान नीति सलाहकार के पद पर काम कर रहीं, डॉ. अंकिता पांडे ने कहा कि एक प्रतिगामी नीति को वापस लेने के लिए पेटा सीपीसीएसईए की सराहना करती है। अंकिता के अनुसार, सीपीसीएसईए के इस फैसले के कारण विज्ञान, पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका थी।
वैज्ञानिक और नैतिक रूप से गलत फैसला
उन्होंने कहा, "टीकों, दवाओं और उपचारों के प्रति मानव प्रतिक्रियाओं की भविष्यवाणी करने के लिए आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों का उपयोग करने वाले परीक्षणों पर निर्भरता वैज्ञानिक रूप से अनुचित है। उन्होंने कहा कि ये फैसला नैतिक आधार पर भी बहुत परेशान करने वाली है।"