पूरी तरह सक्रिय रहे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों को बाहर निकालने के ऑपरेशन में जिस तरह की सक्रियता दिखाई है, उस तरह की सक्रियता इस तरह के मामलों में किसी प्रधानमंत्री के स्तर पर कभी नहीं देखी गई। उन्होंने न केवल अपने केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी और वीके सिंह को इस ऑपरेशन में लगातार मोर्चे पर सक्रिय रखा, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय से दो विशेष अधिकारी नियुक्त कर दिए, जो इस पूरे ऑपरेशन पर बहुत करीब से निगाह रख रहे थे। उन्होंने हर पल सतर्कता अभियान का जायजा लिया और केंद्र से हर संभव सहायता तुरंत उपलब्ध कराई। विदेश से विशेषज्ञों को बुलाने का मामला रहा हो या श्रमिकों की रिहाई के बाद उनका बचाव करने का काम, पीएमओ इस मिशन में पूरी तरह डटा रहा।
स्वयं प्रधानमंत्री लगातार इस मामले में सतर्क रहे। वे प्रधानमंत्री कार्यालय के अपने अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार मामले की जानकारी लेते रहे। श्रमिकों की रिहाई के बाद भी उन्होंने तुरंत खुशी में ट्वीट किया और उनसे बातचीत की। किसी प्रधानमंत्री की ओर से इस तरह की सक्रियता लोगों के बीच भरोसा पैदा करती है। इस ऑपरेशन ने भी एक बार फिर मोदी की जनहितैषी छवि को मजबूत करने का काम किया है। माना जा रहा है कि उन्हें इसका भी लाभ मिल सकता है।
यह कोई पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की हो। इसके पहले भी कुंभ के सफल आयोजन के बाद प्रयागराज में उन्होंने श्रमिकों के पैर धुलकर उनका सम्मान किया था। इसी प्रकार अपने चुनाव क्षेत्र काशी में उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद श्रमिकों के साथ बैठकर भोजन किया था। वे समय-समय पर श्रमिकों के साथ इसी तरह जुड़कर उनका सम्मान करते रहते हैं और उनका मान बढ़ाते रहते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी प्रधानमंत्री ने इसी तरह की पहल कर छात्रों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई थी।
कोरोना काल में जब पूरी दुनिया ठप पड़ गई थी, तब देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रमिकों को अपने घर वापस लौटना पड़ा था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने न केवल श्रमिकों को उनके घर सुरक्षित पहुंचाने का काम किया, बल्कि पूरे कोरोना काल में उन्हें खाने-पीने की कोई कमी न हो, इसका ध्यान रखा। उस दौरान शुरू की गई राशन योजना अब तक जारी है। प्रधानमंत्री के ये पहल उन्हें लोगों के बीच लोकप्रियता दिलाती हैं।
हालांकि, इसी बीच कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने सरकार के कामों की आलोचना भी की है। विपक्षी दलों ने कहा है कि सरकारों की लापरवाही के कारण ही 41 श्रमिकों की जान सांसत में फंसी। श्रमिकों को इस स्थिति में लाने की जिम्मेदार भाजपा सरकार है।
विपक्ष की आलोचना आधारहीन- भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरे राजनीतिक जीवन में इस तरह की कई घटनाएं घटी हैं, जब जनता किसी संकट में घिरी है। लेकिन हर बार प्रधानमंत्री ने यह दिखाया है कि वे जनता के दुख-दर्द में हमेशा डटकर साथ खड़े रहते हैं और समस्या को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। वे कभी हिम्मत नहीं हारते और समस्या के समाप्त होने तक उसे सुलझाने का प्रयास करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार भी जब तक श्रमिकों को सकुशल बचाने का ऑपरेशन चला, प्रधानमंत्री लगातार इसकी जानकारी लेते रहे। अपने चुस्त-दुरुस्त अधिकारियों को मोर्चे पर समस्या का हल होने तक लगाए रखा और मंत्रियों को भी पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हर मामले का अपडेट लिया। यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री लोगों के साथ किस तरह स्वयं को जोड़कर देखते हैं और उनकी यही कोशिश उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बना देता है।
उन्होंने कहा कि इस मामले पर बेहद सफाई के साथ चले पूरे ऑपरेशन और श्रमिकों की सकुशल रिहाई के बाद भी जिस तरह विपक्ष हमला कर रहा है, उससे यही समझ आता है कि उसके पास रचनात्मक विरोध की कोई सोच नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इस तरह की सोच दुर्भाग्यपूर्ण है।