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Uttar Pradesh Assembly Elections: क्या वाकई वरुण गांधी कोई 'बड़ा फैसला' लेने की तैयारी कर रहे हैं?, जानें बड़ी वजह

सार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बढ़ी वरुण गांधी की सक्रियता बढ़ने लगी है। वरुण गांधी इस बारे में अभी कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। मीडिया से खुद को दूर ही रख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता इस तरह की संभावनाओं से जरूर उत्साहित हैं। उमेश पंडित जैसे युवा नेता कहते हैं कि वरुण को तो बिना समय गंवाए भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लेना चाहिए।
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varun gandhi
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विस्तार
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भाजपा और केन्द्र सरकार के कुछ मंत्रियों के सलाहकारों के बीच में किसानों के मुद्दे पर दो चर्चाएं चल रही हैं। पहली तो यह कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार के खिलाफ आंदोलन के जरिए चलाए जा रहे विरोधियों के एक और अभियान को फेल कर दिया। दूसरा टूलकिट फेल हो गया और रास्ता खुल रहा है। मोदी सरकार जीत गई। दूसरी चर्चा वरुण गांधी को लेकर है। कई का मानना है कि मेनका गांधी और वरुण गांधी के भाजपा में दिन लद गए हैं। कोई तंज भरे लहजे में कहता है कि भाजपा भला गांधियों (वरुण और मेनका) को क्यों ढोए और उत्तर प्रदेश के नेता ने तो सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हमेशा वरुण गांधी आक्रामक हो जाते हैं, 2017 में भी हुए थे। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या वरुण गांधी इस बार कोई बड़ा फैसला लेने वाले हैं?

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पिछले चुनाव के दौरान भी तीखे थे वरुण के तेवर
2017 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से काफी पहले वरुण गांधी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक काफी सक्रिय हो गए थे। 2016 में प्रयागराज (इलाहाबाद) में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हुई थी। इसमें वरुण गांधी के पोस्टरों से शहर का कोना-कोना अट गया था। वरुण गांधी के समर्थकों ने अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया था।यहां  2017 के विधानसभा चुनाव के पहले राजनीति और मीडिया में कयास लगाए जा रहे थे कि वरुण गांधी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ सकते हैं। तब वह सुल्तानपुर से सांसद थे। वरुण भी ऐसे सवालों को सुनकर मुस्कराते हुए टाल जाते थे। तब भी यही कहा जा रहा था कि वरुण को कांग्रेस में लाने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा और उनकी टीम कोशिश कर रही है। यह जरूर है कि 2017 से आज तक भाजपा और केन्द्र सरकार में वरुण गांधी को उनके अनुभव और कद को देखते हुए पद, प्रतिष्ठा या मान सम्मान उसके अनुरुप नहीं मिल पाया। उनकी मां और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी को भी 2019 चुनाव के बाद से कैबिनेट में जगह नहीं दी गई।

क्या भाजपा छोड़ देंगे वरुण गांधी?
वरुण गांधी इस बारे में अभी कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। मीडिया से खुद को दूर ही रख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता इस तरह की संभावनाओं से जरूर उत्साहित हैं। उमेश पंडित जैसे युवा नेता कहते हैं कि वरुण को तो बिना समय गंवाए भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लेना चाहिए। वरुण के पिता संजय गांधी द्वारा कांग्रेस में लाए कुछ नेता अब बूढ़े हो रहे हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में आने वाले एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि समझदारी से राजनीति करने की इच्छा शक्ति लेकर वरुण को कांग्रेस में शामिल होने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि,  वह कहते हैं कि यह एक संवेदनशील मसला है और बिना कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के यह संभव नहीं है। यह बहुत आसान फैसला भी नहीं है। वह कहते हैं कि इसे वरुण गांधी और मेनका भी अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि, राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। लेकिन कांग्रेस मुख्यालय से लेकर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की टीम भी इसे लेकर खास प्रतिक्रिया नहीं देते।
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कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में एक चेहरा चाहिए
वरुण के कांग्रेस में शामिल होने, भाजपा का बागी सांसद और नेता होने की संभावना में दम के अपने-अपने कारण हैं। पहला कारण तो वरुण गांधी के किसान आंदोलन पर आ रहे लगातार बयान हैं। जबकि दूसरा कारण कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के मजबूत चेहरे की तलाश है। अभी तक कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी खुद को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पा रही हैं। कांग्रेस नेता पीएल पूनिया भी प्रियंका को राज्य के भावी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश करने के पक्ष में नहीं है। गांधी परिवार से सहानुभूति रखने वाले कांग्रेस से जुड़े नेताओं को प्रियंका के बाद इसके लिए वरुण गांधी उपयुक्त चेहरा लगते हैं। इसका एक कारण वरुण का स्व. संजय गांधी का बेटा होना है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ऐसा होने के बाद अमेठी रायबरेली से लेकर पूरे पूर्वांचल तक राजनीति का माजरा बदल जाएगा।

वरुण गांधी के बोल, उनका तौर तरीका अभी कांग्रेस के नेताओं की इस सोच, संभावना और उम्मीद को बल दे देता है, क्योंकि वह किसान नेता राकेश टिकैत की मांग का समर्थन करते हैं। वह किसान नेता सरदार वीएम सिंह जैसे लोगों से कुछ दूरी बनाकर रखते हैं। सरकार पर एमएसपी की गारंटी देने का लगातार दबाव बना रहे हैं। वरुण गांधी किसान आंदोलन का खुलकर समर्थन करने वाले भाजपा के नेता और सांसद हैं। उनके बयान भाजपा के भीतर भी काफी खलबली मचा रहे हैं। शुक्रवार को वरुण गांधी ने यहां तक कह दिया कि वह सरकार के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाएंगे नहीं, बल्कि किसानों के मुद्दे पर कोर्ट जाएंगे। दरअसल, यह वरुण गांधी का स्मार्ट मूव है। उन्हें पता है कि केन्द्र और प्रदेश सरकार किसान के मुद्दे पर उनकी सुनने वाली नहीं है। इसलिए वहां कोई भी अपील करके अपना राजनीतिक कद गिराने का खतरा मोल लेना होगा। दूसरी तरफ कोर्ट जाने का बयान देकर वह किसानों के साथ-साथ सभी वर्गों में अपनी राजनीतिक छवि को बनाए रख सकेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं कि 41 साल के वरुण गांधी समझदारी के साथ राजनीति करते हैं। वह काफी रिसर्च और होमवर्क करते रहते हैं।  

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