कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने हाथरस में पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर राजनीतिक दलों में हलचल मचा दी थी। जानकारों ने इसे न केवल राहुल गांधी, बल्कि कांग्रेस के लिए भी एक राजनीतिक बढ़त वाला कदम बताया था। इन दोनों नेताओं के बाद दूसरे दलों के प्रतिनिधियों ने भी हाथरस की राह पकड़ ली है। पीड़ित परिवार के यहां से राहुल गांधी और प्रियंका जैसे ही दिल्ली के लिए रवाना हुए, मुख्यमंत्री योगी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की घोषणा कर दी। भाजपा और योगी का ये साफ इशारा था कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यहीं से राहुल गांधी और प्रियंका को घेरने की तैयारी शुरू हो गई है।
खास बात ये है कि उक्त सभी कदम तब उठाए गए, जब कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी, हाथरस के पीड़ितों से मिल कर वापस लौट चुके थे। 19 साल की दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही कड़ी आलोचना का शिकार हो रही थी। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों की सहमति के बिना ही पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। विपक्षी दलों ने योगी सरकार को इस मुद्दे पर भी जमकर घेरा।
उन्होंने कहा कि इस दंगे की वजह से प्रदेश में विकास रुकेगा। इसकी आड़ में विपक्ष को अपनी रोटियां सेंकने का मौका मिलेगा। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। हाथरस में हिंसा भड़काने के लिए कोई साजिश रची गई है और क्या उसके लिए इस्लामिक देशों से आर्थिक मदद मिली है। इस बाबत जांच हो रही है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जो मामला दर्ज किया है, उसके आधार पर आगे बढ़ा जाएगा। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यदि केस दर्ज करने की जरूरत होगी तो वह किया जाएगा। इसमें एनजीओ और दूसरे संगठनों से पूछताछ की जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी एकत्रित किए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे दूसरे संगठनों की भी जांच हो सकती है। अगर उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसी की जांच में दंगे बाबत कुछ ठोस निकलता है तो भाजपा, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को राजनीतिक तौर पर घेर सकती है।