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सोशल मीडिया: तेजी से घट रहा लोगों का भरोसा, भ्रामक खबरों से पैदा हो रही उलझन

सार

साइबर एक्सपर्ट मयंक जायसवाल का कहना है कि अगर सोशल मीडिया के खतरों के प्रति लोगों में जानकारी बढ़े तो इससे विभिन्न समुदायों में गलत संदेश प्रसारित कर वैमनस्य बढ़ाने के गलत प्रयासों को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा लोगों को आर्थिक धोखाधड़ी से भी बचाया जा सकेगा...
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सोशल मीडिया - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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जैसे-जैसे सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है, लोगों का इस पर से भरोसा कम होता जा रहा है। एक ही मुद्दे पर अलग-अलग परस्पर विरोधी जानकारी सामने आने से लोग न केवल सच से दूर हो रहे हैं, बल्कि इससे किसी घटना की सच्चाई के बारे में उनका भ्रम भी बढ़ रहा है। इससे अब लोगों का सोशल मीडिया पर भरोसा कम हो रहा है। अमेरिका के 23 फीसदी लोगों ने माना है कि सोशल मीडिया से मिली जानकारी से किसी घटना के बारे में उनका भ्रम बढ़ा है। विशेषज्ञ इसे लोगों में आ रही जागरूकता की तरह देख रहे हैं। उनका कहना है कि अगर लोग इसी तरह सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठी खबरों के प्रति सचेत रहेंगे, तो इससे न केवल इसका दुरुपयोग रुकेगा, बल्कि लोगों को आर्थिक धोखाधड़ी से बचाने में भी मदद मिलेगी।

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प्यू रिसर्च की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2018 में अमेरिका के 36 फीसदी लोग मानते थे कि सोशल मीडिया से मिली जानकारी से किसी घटना के बारे में उनकी जानकारी बढ़ी है और उन्हें पर्याप्त सूचना मिली है, जबकि अब यह संख्या घटकर केवल 29 फीसदी रह गई है। यानी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली जानकारी पर एक तिहाई अमेरिकियों से भी कम लोग भरोसा करते हैं और इसमें लगातार कमी आ रही है।

जबकि ऐसे लोगों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है जिन्होंने माना कि सोशल मीडिया से प्राप्त सूचना उन्हें किसी घटना के सच के बारे में भ्रम पैदा कर रही है। 2018 में ऐसे लोगों की संख्या 15 फीसदी थी जो अब बढ़कर 23 फीसदी हो गई है। यानी लगभग एक चौथाई लोग मान रहे हैं कि सोशल मीडिया की खबरें उन्हें सच बताने के स्थान पर भ्रम में डाल रही हैं।
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सर्वे में शामिल 53 फीसदी लोगों ने कहा है कि किसी घटना के बारे में उन्हें सोशल मीडिया से जानकारी मिली। हालांकि, रिसर्च में शामिल 47 फीसदी लोगों ने माना है कि उन्हें सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। सोशल मीडिया से सूचना प्राप्त करने के बारे में फेसबुक सबसे ऊपर है। 36 फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें किसी घटना के बारे में फेसबुक से सूचना मिली। यूट्यूब इसमें 23 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर और ट्विटर 15 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर हैं।

लेकिन जिन मीडिया संस्थाओं के उपभोक्ता आधारिक समाचारों के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं, उसमें ट्विटर सबसे ऊपर है। ट्विटर के 59 फीसदी यूजर आधिकारिक जानकारी के लिए ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं। फेसबुक इसमें 54 फीसदी के साथ दूसरे और यूट्यूब 32 फीसदी के साथ चौथे नंबर पर है।

फेसबुक का समाचारों के लिए नियमित इस्तेमाल करने वालों में महिलाएं (63%) और पुरुष 35 फीसदी हैं, जबकि ट्विटर का समाचार के लिए इस्तेमाल करने वाले रेगुलर यूजर में 54 फीसदी पुरूष और 43 फीसदी महिलाएं हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

साइबर एक्सपर्ट मयंक जायसवाल ने अमर उजाला से कहा कि सोशल मीडिया का लगातार बढ़ता इस्तेमाल लोगों तक सूचना पहुंचाने का प्रमुख साधन बन गया है, लेकिन कई जगहों पर इसका बड़ा दुरुपयोग हो रहा है। राजनीतिक मामलों में अपनी विचारधारा के अनुसार कोई सूचना जनता तक पहुंचाने से लेकर अपराधी आर्थिक धोखाधड़ी करने के लिए इस मंच का जबरदस्त उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर सोशल मीडिया के खतरों के प्रति लोगों में जानकारी बढ़े तो इससे विभिन्न समुदायों में गलत संदेश प्रसारित कर वैमनस्य बढ़ाने के गलत प्रयासों को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा लोगों को आर्थिक धोखाधड़ी से भी बचाया जा सकेगा।

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