यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) के प्रमुख सामंथा पावर ने बुधवार को भारत की सराहना की है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका की मदद करने के लिए भारत ने तेजी से प्रतिक्रिया करते हुए मानवीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भारत ने आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे श्रीलंका की भारत ने समय रहते मदद की है। वहीं, चीन ने राहत प्रदान करने में रुचि नहीं दिखाई।
गौरतलब है कि सामंथा पावर 25 से 27 जुलाई तक भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने ये बातें दिल्ली-आईआईटी संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने ये भी कहा कि चीन श्रीलंका के ‘सबसे बड़े लेनदारों’ में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने श्रीलंका को मानवीय सहायता में पहले ही 16 मिलियन डॉलर की आपूर्ति की है। इसने किसानों को भविष्य में भोजन की कमी को दूर करने में मदद करने के लिए एक लाख टन जैविक उर्वरक का निर्यात किया है। साथी ही भारत ने श्रीलंका सरकार को 3.5 अरब डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट की आपूर्ति की है।
उन्होंने अपने संबोधन में आशा व्यक्त करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि क्या बीजिंग अन्य द्विपक्षीय लेनदारों की तरह ही कर्ज का पुनर्गठन करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह आवश्यक है कि बीजिंग अन्य सभी लेनदारों के साथ पारदर्शी रूप से और समान शर्तों पर ऋण राहत में भाग ले। उन्होंने अपने भाषण में उल्लेख किया कि भारत ने कठिनाई के समय में दुनिया भर के देशों की मदद की है।
सभी देशों को अनाज निर्यात सौदे की शर्तों पर कायम रहने की जरूरत
यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) की विजिटिंग एडमिनिस्ट्रेटर सामंथा पावर ने कहा कि रूस सहित सभी देशों को अनाज निर्यात सौदे की शर्तों पर कायम रहने की जरूरत है। रूस को सौदे की शर्तों का सम्मान करना होगा और यह महत्वपूर्ण है कि सभी देश, न केवल अमेरिका, बल्कि भारत भी सौदे की शर्तों पर रूस को पकड़ें। उन्होंने आगे कहा कि अब तक हमने रूसी संघ से जो देखा है वह झूठ और टूटे हुए वादों की एक कड़ी है। इतना ही नहीं ये नागरिक बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी हमलों की एक कड़ी है।
गौरतलब है कि यूक्रेन पर अपने आक्रमण के बाद रूस ने यूक्रेनी बंदरगाहों तक समुद्री पहुंच को अवरुद्ध कर दिया है। जिसके परिणामस्वरूप यूक्रेन से लाखों टन अनाज का निर्यात पूरी तरह से बंद हो गया। इसके कारण ही वैश्विक खाद्य संकट पैदा हो गया है।
वैश्विक खाद्य और ऊर्जा संकट पर दिया बयान
वैश्विक खाद्य और ऊर्जा संकट का उल्लेख करते हुए पावर ने दिल्ली में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि श्रीलंका की सरकार सबसे पहले गिर गई थी, लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव के कारण कम से कम 17 देशों में भोजन और ईंधन की कीमतों को लेकर पहले भी विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर इतिहास कोई मार्गदर्शक है, तो हम जानते हैं कि श्रीलंका की सरकार गिरने वाली आखिरी नहीं होगी। पावर ने कहा कि भारत की तरह, यूक्रेन एक वैश्विक ब्रेडबैकेट है, जो हर साल लगभग 50 मिलियन टन गेहूं का निर्यात करता है।