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Tibet: 'चीन के साथ अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता रिजॉल्व तिब्बत एक्ट लाने की मुख्य वजह'; पूर्व एनएसए का दावा

Wed, 17 Jul 2024 07:52 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियां अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर तकरार देखने को मिलती है। इस कड़ी में अमेरिका की तरफ से रिजॉल्व तिब्बत एक्ट लाने पर चीन ने तीखी आपत्ति जताई है। वहीं पूर्व एनएसए ने इसे लेकर अलग तर्क दिया है।
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रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर पूर्व एनएसए का दावा - फोटो : Freepik
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विस्तार
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पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिका की तरफ से हाल में 'रिजॉल्व तिब्बत एक्ट' लाने के पीछे की मुख्य वजह चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता है। इस दौरान इस बात से साफ इनकार किया कि इस एक्ट को लाने की वजह तिब्बत के लिए अमेरिका बिल्कुल भी चिंतित नहीं है।
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'अपने हित में लहरा रहे हैं तिब्बत का झंडा'
पूर्व एनएसए शिवशंकर मेनन ने पूर्व राजनयिक दिलीप सिन्हा की किताब 'इम्पीरियल गेम्स इन तिब्बत: द स्ट्रगल फॉर स्टेटहुड एंड सॉवरीनिटि' के विमोचन के अवसर पर ये तर्क दिया है कि तिब्बत के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता की 'स्पष्ट सीमाएं' हैं और वे आज अपने हित में तिब्बत का झंडा लहरा रहे हैं।

'वे तिब्बत को मान्यता देने के दायरे तक नहीं जाना चाहते'
शिवशंकर मेनन ने आगे कहा, कि मैं यह कहने में बहुत सावधानी बरतना चाहूंगा कि दुनिया बदल गई है क्योंकि उन्होंने एक कानून पारित कर दिया है। मुझे लगता है कि आपको शक्तियों के बुनियादी सह-संबंध और शक्तियों के संतुलन, लोगों की वास्तविक ताकत और महाशक्तियों के हित क्या हैं और वे इस समय इसे कैसे देखते हैं, इस पर गौर करने की जरूरत है। साल 2006-09 तक विदेश सचिव रह चुके शिवशंकर मेनन ने कहा कि आज, अमेरिकी तिब्बत का झंडा लहराने को अपना हित मानते हैं, लेकिन वे तिब्बत को मान्यता देने के दायरे तक नहीं जाना चाहते। क्योंकि यह तिब्बत के लिए चिंता से प्रेरित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य कारण चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता है।
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हाल ही में जो बाइडन के हस्ताक्षर से बना कानून
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से हाल में इससे जुड़े विधेयक पर हस्ताक्षर करने से यह कानून बना गया है, जो तिब्बत के लिए अमेरिकी समर्थन को बढ़ाता है और सुदूर हिमालयी क्षेत्र की स्थिति और शासन पर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए चीन और दलाई लामा के बीच बातचीत को बढ़ावा देता है। वहीं दूसरी ओर चीन ने रिजॉल्व तिब्बत एक्ट का पुरजोर विरोध करते हुए इसे अस्थिरता पैदा करने वाला कानून बताया था। बता दें कि यह कानून अमेरिकी अधिकारियों को चीन सरकार की ओर से तिब्बत के बारे में गलत सूचनाओं का सक्रिय और सीधे तौर पर मुकाबला करने का अधिकार देता है।

वहीं दिलीप सिन्हा की किताब की प्रशंसा करते हुए शिवशंकर मेनन ने कहा कि इसमें घटनाक्रम का ईमानदार विवरण है- चाहे वह महाशक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता हो, या कि तिब्बत पर इसका क्या प्रभाव पड़ा या भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है।
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