अफगान नेशनल डिफेंस और सिक्योरिटी पर्सनल का डाटा देखें तो वह संख्या करीब तीन लाख है। इनमें 182071 आर्मी और एयरफोर्स कर्मी हैं। बाकी 118628 पुलिस और अर्धसैनिक सिक्योरिटी यूनिट्स हैं। बतौर बीएस सिवाच, अमेरिका ने बीस साल में अफगान आर्मी को अच्छे से तैयार किया था। वहां की एयरफोर्स में बेहतरीन पायलट भी रहे हैं। अभी वे छिपे हुए हैं। हो सकता है कि बाद में वे व्यवस्था को देखकर सामने आ जाएं। ऐसे में तालिबान शासन उन्हें पायलट रख सकता है। अफगान आर्मी के जवान और एयरफोर्स कर्मी अभी देखो और इंतजार करो की स्थिति में हैं। अगर वे लंबे समय तक बाहर नहीं आते तो पाकिस्तान के पायलट, तालिबान के यूएस जहाजों एवं हेलीकॉप्टर को उड़ाने की ट्रेनिंग दे सकते हैं। अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़ने से पहले सभी एयरक्रॉफ्ट, वाहन और हथियार पूरी तरह नष्ट कर देने चाहिए थे। ये चूक कई देशों, और खुद अमेरिका के लिए भी भारी पड़ सकती है।
अमेरिका सेना इन उपकरणों को तैयार नहीं करती है। जिन कंपनियों में ये एयरक्रॉफ्ट तैयार होते हैं, तालिबान वहां संपर्क कर सकता है। उनके मैकेनिक और इंजीनियर को मर्सनरी यानी किराये पर ला सकता है। इससे अमेरिका के सभी वाहनों और एयरक्रॉफ्ट का इस्तेमाल किया जा सकेगा। रक्षा विशेषज्ञ, संजय कुलकर्णी के अनुसार, अफगान आर्मी वाले वापस आएंगे। अभी वे भूमिगत हैं। अगर स्थिति सुधरती है तो वे नए पायलटों को ट्रेनिंग दे सकते हैं। देर-सवेर उन्हें आना ही होगा। यह बात वे भी जानते हैं और तालिबान भी समझता है। तालिबान खुद उन्हें किसी शर्त, जैसे आकर्षक वेतन भत्ते, आदि देकर वापस काम पर ला सकता है।
एयरक्रॉफ्ट और हेलीकॉप्टरों के अलावा तालिबान के पास अमेरिकी 22174-हम्वी, 634 एमआई 117, 155 एमएक्सएक्स प्रो माइन प्रूफ व्हीकल, 169 एमआई 13 आर्म्ड पर्सनल कैरियर, 42000 पिकअप ट्रक एंड एसयूवी, 64363 मशीनगन, 8000 ट्रक, 162043 रेडियो, 16035 नाइट गॉगल, 358530 असॉल्ट राइफल्स, 126295 पिस्टल और 176 आर्टलरी पीस मौजूद हैं।