अमर उजाला ने वैज्ञानिकों समेत कई विशेषज्ञों से व्हाट्सएप पर पूछा शब्दों का अर्थ। कई ने हाथ जोड़ते, मुस्कराती और चुप्पी साधने वाले संकेतक भेजे, तो कुछ ने कनिष्ठ से शब्दकोष पलटवाया, कुछ यही नही समझे कि यह हिंदी है या संस्कृत।
यूपीएससी की हिंदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों से लेकर वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों समेत सरकारी सेवा में काम कर रहे दूसरे विषय विशेषज्ञों तक को हैरान किया है। अमर उजाला ने सरकारी सेवा में काम कर रहे करीब 50 वरिष्ठ अधिकारियों से सिविल सेवा परीक्षा में इस्तेमाल हिंदी का अर्थ जानने के लिए व्हॉट्सएप पर संपर्क किया।
विज्ञापन
कुछ अधिकारियों ने संदेश भेजने वाले की सेहत ठीक होने की उम्मीद जताते हुए अपना ख्याल रखने की सलाह दी। वहीं, कुछ अधिकारियों ने कनिष्ठ अधिकारियों से शब्दकोष पलटवाया, जबकि शब्दों की जटिलता को देखते हुए कुछ यही नही समझ सके कि यह हिंदी है या संस्कृत। कई अधिकारियों ने हाथ जोड़ती, मुस्कराती और चुप्पी साधने वाले संकेतक भेजे।
दिलचस्प यह कि विषय विशेष के जानकारों ने जब अपने विषय से जुड़े शब्दों का जवाब भेजा, तो उनमें भी अंग्रेजी में अनुवादित शब्दों का ही सहारा लिया। वह हिंदी के पर्यायवाची भी नहीं ढूंढ सके। दिलचस्प यह है कि कोई भी अधिकारी 30 फीसदी शब्दों का सही जवाब नहीं दे सका।
विज्ञापन
हिंदी प्रतिभागियों के साथ ज्यादती होने की बात कहते हुए ज्यादातर अधिकारियों ने यूपीएससी को सलाह दी कि संस्था हिंदी के शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान दे। जटिल शब्दों की जगह आम प्रयोग में आने वाले शब्दों का ही इस्तेमाल हो।