लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि वर्तमान में यूपी की गन्ना मिलों पर किसानों का 4,832.49 करोड़ रूपये भुगतान के लिए शेष है। किसानों को कुल 35,201.22 करोड़ रूपये का भुगतान किया जाना था, जिसमें से चीनी मिलों के द्वारा उन्हें 30,368.73 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। यह कुल देय राशि का 86.27 प्रतिशत है, लेकिन 4832.49 करोड़ रूपये भुगतान के लिए अभी भी शेष है। बसपा सांसद दानिश अली ने केंद्र से इस मुद्दे पर शून्यकाल के अंतर्गत पांच अगस्त को जवाब मांगा था, जिसके उत्तर में केंद्र ने यह सूचना उपलब्ध कराई है।
गन्ना मूल्य के संदर्भ में यह नियम भी बनाया गया था कि किसानों को उनकी फसल का मूल्य 14 दिन के अंदर मिल जाना चाहिए, लेकिन केंद्र के जवाब से ही यह स्पष्ट है कि इस घोषणा का पालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि, 14 दिन से ज्यादा की देरी होने पर किसानों को ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है, लेकिन इसका भी किसानों को कोई लाभ होता नहीं दिखाई पड़ता है। किसानों को जब बुवाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए धन की आवश्यकता होती है, तब उन्हें उनका अपना ही धन उपलब्ध नहीं हो पाता जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। कई बार उन्हें महंगी दर पर बाजार से कर्ज लेना पड़ता है।
सांसद दानिश अली ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं को किसानों की हितैषी दिखाने की कोशिश करती हैं, लेकिन केंद्र के जवाब से स्पष्ट हो गया है कि दोनों ही सरकारें किसानों के नाम पर केवल घोषणाएं करती हैं और वे उनके हितों के लिए जमीन पर कोई काम करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि केंद्र-यूपी सरकार को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए किसानों को उनके गन्ने का भुगतान कराना चाहिए।
क्या हुआ था?
- अमरोहा से सांसद कुंवर दानिश अली ने संसद में शून्यकाल काल के दौरान दिनांक 5 अगस्त 2022 को गन्ना किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराए जाने का मुद्दा उठाया था। जिसके उत्तर में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजानिक वितरण एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा है कि एक सितंबर 2022 तक की नवीनतम सूचना के अनुसार पेराई सत्र 2021-22 में प्रदेश की चीनी मिलों को कुल देय गन्ना मूल्य रू. 35,201.22 करोड़ के सापेक्ष 30,368.73 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। कुल देय का 86.27 प्रतिशत है। वर्तमान में उक्त सत्र का रू. 4,832.49 करोड़ भुगतान हेतु शेष है।
- संसदीय क्षेत्र अमरोहा के अन्तर्गत चीनी मिल सिम्भावली पर बकाया गन्ना मूल्य का मामला भी उठाया गया है। सिम्भावली शुगर्स लि. सिम्भावली, हापुड़ द्वारा पेराई सत्र 2021-22 के अन्तर्गत कुल देय गन्ना मूल्य 501.69 करोड़ के सापेक्ष 263.60 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में चीनी मिल सिम्भावली पर 238.09 करोड़ रूपये भुगतान हेतु बकाया है।
- उ.प्र. गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 की धारा- 17 (3) में ब्याज के सम्बन्ध में नियम बनाए गए हैं। इसमें गन्ना मूल्य भुगतान में देरी करने पर मिलों को गन्ना समितियों की ओर से समय-समय पर ब्याज के बिल भेजे जाते हैं। इसी कम में बजाज हिन्दुस्तान शुगर लि. इकाई- गोला गोकरननाथ, लखीमपुर खीरी के विरूद्ध पेराई सत्र 2021-22 के अन्तर्गत बकाये गन्ना मूल्य की ब्याज सहित वसूली हेतु वसूली प्रमाण पत्र निर्गत किया जा चुका है। उन्होंने बताया है कि राज्य सरकार अवशेष गन्ना मूल्य के भुगतान हेतु सजग है।