कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी से कांग्रेस की उम्मीदवार हो सकती हैं। प्रदेश के राजनैतिक गलियारों समेत लखीमपुर जिले में प्रियंका के चुनाव लड़ने की चर्चा हो रही है। दरअसल लखीमपुर वही जिला है जहां केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की गाड़ी से चार किसानों की कुचलकर मौत हो गई थी। किसानों की मौत के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे को पुलिस ने मुख्य आरोपी बनाते हुए चार्जशीट फाइल कर दी है। पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने न सिर्फ लखीमपुर खीरी में बड़ा आंदोलन खड़ा किया बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल का आगाज भी एक तरह से लखीमपुर की जमीन से ही किया। हालांकि प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी से चुनाव लड़ेंगी या नहीं इसका अभी कोई आधिकारिक तौर पर न तो एलान हुआ है और न ही पार्टी की ओर से ऐसा कोई बयान जारी हुआ है।
लेकिन सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी के लिए जिला लखीमपुर खीरी की पलिया सीट से चुनाव लड़ाने की सुगबुगाहट शुरू हुई है। हालांकि इस पर अभी पार्टी का कोई भी नेता और कोई पदाधिकारी कुछ बोलने से बच रहा है। लखीमपुर खीरी के पलिया विधानसभा सीट पर सिखों की अच्छी खासी तादाद है। इसके अलावा लखीमपुर के निघासन के पास हुई घटना में मारे गए कुछ किसान लखीमपुर की पलिया विधानसभा के थे। ऐसे में चर्चा यही है कि प्रियंका गांधी लखीमपुर की पलिया विधानसभा से चुनाव लड़ सकती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ इसके नफा-नुकसान भी जोड़ रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लखीमपुर खीरी में प्रियंका के चुनाव लड़ने से सिर्फ लखीमपुर की विधानसभाओं पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि आसपास के जिले की विधानसभाओं पर कांग्रेस कुछ असर डाल सकती है। उनका कहना है लखीमपुर खीरी विपरीत परिस्थितियों में भी कांग्रेस के लिए राजनैतिक तौर पर फायदेमंद जिला माना जाता रहा है। अजय मिश्र टेनी से पहले कांग्रेस के जफर अली नकवी लखीमपुर से सांसद थे। जबकि लखीमपुर के ही कई जिलों कस्बों और तहसीलों से मिली हुई लोक सभा धौराहरा से कांग्रेस के जितिन प्रसाद न सिर्फ सांसद थे बल्कि मंत्री भी रहे। उससे पहले भी कांग्रेस के कई सांसद यहां से दिल्ली में इस इलाके का प्रतिनिधित्व करते रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि प्रियंका गांधी अगर लखीमपुर खीरी से चुनाव लड़ती हैं, तो इसका असर लखीमपुर खीरी से लगते हुए पीलीभीत और शाहजहांपुर जिले में भी सिखों के बड़े वोट बैंक पर पड़ेगा क्योंकि लखीमपुर, पीलीभीत और शाहजहांपुर में सिखों की एक बड़ी आबादी है। इन सभी सिखों का और उनके परिवार का पूरा कुनबा तराई के इस इलाके से लेकर पंजाब तक से जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को बहुत करीब से समझने वाले राजनीतिक विशेषज्ञ एचके सिंह कहते हैं कि अब यह फैसला तो कांग्रेस को करना है कि यहां से कांग्रेस का सबसे कद्दावर नेता चुनाव लड़ता है या कोई और। लेकिन सिंह इस बात से सहमत हैं कि लखीमपुर खीरी में प्रियंका गांधी अगर चुनाव लड़ती हैं तो उसका असर पंजाब और उत्तराखंड तक पर पड़ेगा।
लखीमपुर में हुए किसानों और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे के बीच के संघर्ष को कांग्रेस ने सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पूरा पंजाब लखीमपुर खीरी में बैठ गया था। पंजाब में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हों या कांग्रेस प्रदेश कमेटी के मुखिया नवजोत सिंह सिद्धू या पंजाब सरकार से एक दर्जन मंत्री। सभी नेताओं ने लखीमपुर खीरी में न सिर्फ आंदोलन को तेज किया था, बल्कि नवजोत सिंह सिद्धू तो धरने पर भी बैठ गए थे। लखीमपुर खीरी में इस तरह की चर्चाएं हो रही हैं कि कहीं प्रियंका गांधी लखीमपुर की पलिया विधानसभा से चुनाव तो नहीं लड़ेंगी। लखीमपुर खीरी के एक वरिष्ठ राजनीतिक जानकार कहते हैं कि चर्चाएं तो बहुत जोरों पर हैं कि लखीमपुर खीरी से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ सकती हैं।
प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर वह सीधे तौर पर कहते हैं कि अगर गांधी परिवार से कोई यहां से चुनाव लड़ेगा तो निश्चित तौर पर चुनाव की दशाएं और दिशाएं तो बदल ही जाएंगी। वह मानते हैं कि लखीमपुर की फिजाओं में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इस जिले से कांग्रेस का कोई बड़ा नेता इस विधानसभा के चुनाव में जोर आजमाइश कर सकता है। उनका कहना है कि जवाहरलाल नेहरू के दौर से लेकर प्रियंका गांधी और राजीव गांधी के दौर से लेकर मनमोहन सिंह तक के दौर में लखीमपुर खीरी कांग्रेस के लिए हमेशा मनमाफिक चुनावी परिणाम देता आया है। ऐसे में इस जमीन से चुनाव लड़ने में कांग्रेस को न तो कोई हिचक हो सकती है और न ही कोई ऐसी बाधा, जो चुनावी परिणाम में आड़े आ रही हो।
गुरुवार को उत्तर प्रदेश के टिकट घोषित करते समय प्रियंका गांधी से जब यह सवाल किया गया था कि क्या वह भी उत्तर प्रदेश के चुनाव मैदान में उतरेंगी या नहीं, तो उन्होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया था। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का मानना है कि प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी या नहीं, यह उनपर निर्भर करता है। हालांकि कई दफा प्रियंका गांधी इस बात का जिक्र कर चुकी हैं कि अगर पार्टी चाहेगी तो किसी भी जिम्मेदारी के लिए वs हमेशा आगे खड़ी रहेंगी।