अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज के कई जिलों में 'अमर उजाला' का यह चुनावी कार्यक्रम हो चुका है। गाजियाबाद से शुरू हुआ 'सत्ता का संग्राम' मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा से होते हुए मैनपुरी पहुंचा। करीब 15 जिले और हजारों युवाओं से बातचीत में युवाओं ने सबसे ज्यादा रोजगार और खेलों के लिए स्टेडियम बनाने की मांग की।
अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। नेता-मंत्री सब इस चुनावी रंग में रंग चुके हैं। नेताओं ने जनता तक पहुंचने की कोशिशें तेज कर दी हैं। लोगों के चुनावी मिजाज, उनके मुद्दों को जानने और समझने के लिए ‘अमर उजाला’ के चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' के तहत हमने भी हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं-युवाओं से संवाद किया और राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे गए। हमने युवाओं से यह जानने की कोशिश की कि उनके लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है और वे किस मुद्दे को लेकर वोट डालेंगे।
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15 जिलों के युवाओं में सबसे गंभीर मुद्दा बेरोजगारी का है। रोजगार न मिलने से युवा बेहद परेशान दिखे। वहीं, कोरोना संकट की वजह से रोजगार के अवसरों में हुई कमी ने उन्हें भविष्य की चिंता में डाल दिया है। छात्राओं के लिए आगे बढ़ने के अवसर की गारंटी के साथ-साथ सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है।
बिहार चुनाव में बदल गया था रुख
जिस तरह बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरियों का वायदा किया, उसने पूरे चुनाव का रुख मोड़ दिया था। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि राज्य में बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं। उत्तर प्रदेश के युवाओं के चुनावी मूड को टटोलने के बाद भी ऐसा ही माना जा सकता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी रोजगार एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है। यह बात हम यूं ही नहीं कह रहे, बल्कि हमारे चुनावी रथ ने युवाओं से जो बातचीत की है, उस आधार पर यह निष्कर्ष निकला है कि युवाओं के बीच बेरोजगारी का मुद्दा टॉप पर है।
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राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि रोजगार का मुद्दा ऐसा है जो जाति-धर्म, समुदाय और अमीरी-गरीबी से ऊपर है। हर वर्ग को काम चाहिए और काम के लिए सुविधाएं चाहिए इसलिए जो भी पार्टी रोजगार को अपना मुद्दा बनाएगी, चुनाव में उसकी जीत निश्चित है।
गाजियाबाद के नेहरु स्टेडियम में चुनाव पर चर्चा करते हुए युवा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार से समझिए युवाओं के लिए कौन सा मुद्दा सबसे अहम रहा
अच्छी नौकरी की तलाश में बाहर जाना जरूरी
अमर उजाला' का चुनावी रथ जब पहले दिन 11 नवंबर को गाजियाबाद में युवाओं के बीच पहुंचा तो यहां के युवाओं की राय यह थी कि शिक्षा के स्तर में सुधार से उन्हें फायदा तो मिल रहा है, लेकिन उनके लिए बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा था। इसी तरह दूसरे दिन हमारी टीम जब मुरादाबाद के तीर्थकर महावीर यूनिवर्सिटी में पहुंची तो यहां भी सभी ने रोजगार, शिक्षा और विकास के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। छात्र विनीत कुमार ने कहा सरकार को युवाओं के रोजगार पर फोकस करना चाहिए। छात्रा अस्मिता की चिंता यह दिखी कि मुरादाबाद में रोजगार की ज्यादा संभावनाएं नहीं है। अच्छी नौकरी के लिए बाहर जाना उन जैसे युवाओं की मजबूरी है।
13 नवंबर को रामपुर के इंपैक्ट कॉलेज में भी युवाओं से बातचीत में सभी ने एकमत से रोजगार को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया। महिला सुरक्षा को लेकर यहां छात्राओं की मिलीजुली राय रही। 14 नवंबर को बरेली में युवाओं से बातचीत के बीच खेल स्टेडियम और रोजगार का मुद्दा छाया रहा। युवाओं ने मांग की कि बरेली में खेलने के लिए स्टेडियम होना चाहिए।
उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने को मजबूर छात्र
15 नवंबर को बदायूं के राजकीय महाविद्यालय में चर्चा के दौरान एक ऐसा मुद्दा उठा, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। युवाओं ने राजनीतिक मुद्दों से इतर बदायूं को उसके गौरवशाली इतिहास की प्रसिद्धी वापस लौटाने को लेकर जोर दिया। 16 नवंबर को पीलीभीत में जेएमबी इंस्टीट्यूट देवीपुरा में छात्रा नेहा ने कहा कि पहले के मुकाबले शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम हुआ है, लेकिन अभी भी बेहतर शिक्षा के लिए युवाओं को बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है। बड़े शहरों में ही ज्यादा अच्छी शिक्षा और सुविधाएं मिलती हैं। चंद्रशेखर ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सुविधा शुरू करने की मांग की। छात्रा खुशी के मुताबिक महिला सुरक्षा को लेकर और सुधार की जरूरत है।
फर्रुखाबाद में चुनावी मुद्दों पर बात करने के लिए जुटे युवा।
- फोटो : अमर उजाला
आरक्षण से सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए मुश्किल
शाहजहांपुर में 17 नवंबर को एसएस कॉलेज में छात्र मानवेंद्र यादव ने भी युवाओं की बेरोजगारी की ही बात की। वहीं, मनु शुक्ला ने आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के युवा अधिक योग्यता के बावजूद रोजगार नहीं हासिल कर पाते हैं। 18 नवंबर को लखीमपुर खीरी के वाईडी कॉलेज में यहां के युवाओं ने रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर मौजूदा सरकार को घेरा। एक और युवा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काफी कमियां हैं।
उद्योग की कमी से युवाओं को नहीं मिलता काम
19 नवंबर को शहर के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में ताइक्वांडो खिलाड़ी स्वर्णिम शुक्ला ने कहा कि बताया कि खिलाड़ियों को पहले के मुकाबले ज्यादा सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं, युवाओं ने रोजगार और शिक्षा को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए। दीक्षित नाम के एक युवक ने कहा कि वर्तमान सरकार में प्रशासन की व्यवस्था ठीक है, लेकिन रोजगार की समस्या है। वहीं, रामगोपाल ने कहा कि यहां उद्योग है ही नहीं, जो युवाओं को रोजगार मिल सके। सीतापुर में रोजगार के अन्य साधन नहीं हैं।
कई खेलों के लिए कोच नहीं, सुविधाओं की कमी
21 नवंबर को फतेहगढ़ स्थित ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में खिलाड़ी और युवाओं के बीच पहुंची, हमारी टीम को यह महसूस हुआ कि खिलाड़ियों में जनप्रतिनिधियों को लेकर नाराजगी है। नेशनल शूटर अनिल पाल ने कहा कि जिले के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का सपोर्ट नहीं मिलता है। स्टेडियम में कई खेलों के कोच नहीं हैं। पूर्वी कुशवाहा बोलीं जिले में अच्छे कॉलेज भी नहीं हैं। बेहतर पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ता है। वहीं महिला सुरक्षा को लेकर शबनम व अंजली बोलीं कि मौजूदा सरकार की वजह से घर से निकलने पर उनको अब डर नहीं लगता है।
22 नवंबर को कन्नौज के बोर्डिंग मैदान में युवाओं के बीच से चर्चा से यह निकल कर आया कि यहां के युवा विकास और रोजगार के मुद्दे पर ही वोट डालेंगे। निरंजन त्रिवेदी ने कहा कि हमारी सरकार ने पूरे प्रदेश में 17 मेडिकल कॉलेज बनवाए हैं। पिछली सरकार में केवल तीन-चार मेडिकल कॉलेज थे। वहीं हमें अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी मिला है।
इटावा में चुनावी मुद्दों पर बात करते युवा।
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर विवाद नापसंद
23 नवंबर को इटावा के एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ाई करने पहुंचे युवाओं से बात करने का मौका मिला। यहां तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने का मुद्दा छाया रहा। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिवम वर्मा ने कहा कि कृषि कानून बहुत अच्छा था। ये छोटे किसानों के हित के लिए था। वहीं मथुरा के रहने वाले मोहम्मद मुकीम ने कहा कि मौजूदा सरकार से वह खुश तो हैं, लेकिन इस सरकार में हिंदू-मुस्लिम बहुत ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए, ये अच्छी बात नहीं है।
कानून व्यवस्था ठीक करे सरकार
24 नवंबर को मैनपुरी के भोगांव रोड स्थित फूलबाग में कुछ छात्रों ने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया। वहीं एक छात्र राजीव ने आरक्षण के बारे में बात की और कहा कि आरक्षण का फायदा जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक हैसियत के आधार पर मिलना चाहिए। वहीं एक युवा ने आरोप लगाया कि सरकार ने रोजगार देने के बजाए छीनने का काम किया है।