UP Election 2022: पंजाब के सीएम चन्नी की यूपी कांग्रेस में बढ़ी मांग, चुनाव में बनेंगे पार्टी के प्रचार का प्रमुख चेहरा
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 04 Dec 2021 01:50 PM IST
सार
एससी सीटों के कई भावी उम्मीदवार और नेता चाहते हैं कि चुनाव की घोषणा होने से पहले चन्नी उनके क्षेत्र में आएं। कांग्रेस जल्दी ही टाऊन हॉल कार्यक्रम शुरू करने जा रही है जिसमें चन्नी प्रमुख चेहरा होंगे।
पूर्व विधायक राम कुमार चौधरी पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का स्वागत करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के सीएम हैं, लेकिन महज चंद दिनों में देश भर में वे लोकप्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक उनकी लोकप्रियता यूपी में भी बढ़ गई है। खासतौर पर दलित युवाओं के बीच चन्नी को पसंद करने वालों की संख्या बढ़ी है। यूथ कांग्रेस से जुड़े कई युवा सोशल मीडिया पर चन्नी को फॉलो करने लगे हैं। इसलिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चन्नी की मांग बढ़ गई है। खासतौर पर एससी सीटों के भावी उम्मीदवार और नेता चाहते हैं कि आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले चन्नी उनके चुनाव क्षेत्र का एक चक्कर जरूर लगाएं।
बताया जा रहा है चन्नी कुछ महत्वपूर्ण एससी सीटों पर कांग्रेस के टाऊन हॉल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और युवाओं से चर्चा करेंगे। वहीं चुनाव प्रचार के लिए भी वे पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा होंगे। चन्नी यूपी के अलावा उत्तराखंड में भी पार्टी के लिए प्रचार कर सकते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद चन्नी इसी साल 19 सितंबर को पंजाब के सीएम बने हैं।
टाउन हॉल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे चन्नी
एससी सीट के एक भावी उम्मीदवार ने बताया ‘एससी वर्ग के युवाओं में चन्नी साहब काफी फेमस हो गए हैं। इसी बात को देखते हुए प्रियंका गांधी ने उन्हें यूपी चुनाव में अपना समय देने को कहा है। हालांकि उसी समय पंजाब में भी चुनाव हो रहे होंगे, जाहिर है सीएम साहब व्यस्त रहेंगे। लेकिन फिर भी वे यहां आने को तैयार हो गए हैं। टाउन हॉल कार्यक्रमों के जरिए वे युवाओं से रुबरु होंगे। हमारे क्षेत्र में जल्दी ही उनका कार्यक्रम होगा।’
पूर्व विधायक राम कुमार चौधरी पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का स्वागत करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के सीएम हैं, लेकिन महज चंद दिनों में देश भर में वे लोकप्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक उनकी लोकप्रियता यूपी में भी बढ़ गई है। खासतौर पर दलित युवाओं के बीच चन्नी को पसंद करने वालों की संख्या बढ़ी है। यूथ कांग्रेस से जुड़े कई युवा सोशल मीडिया पर चन्नी को फॉलो करने लगे हैं। इसलिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चन्नी की मांग बढ़ गई है। खासतौर पर एससी सीटों के भावी उम्मीदवार और नेता चाहते हैं कि आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले चन्नी उनके चुनाव क्षेत्र का एक चक्कर जरूर लगाएं।
बताया जा रहा है चन्नी कुछ महत्वपूर्ण एससी सीटों पर कांग्रेस के टाऊन हॉल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और युवाओं से चर्चा करेंगे। वहीं चुनाव प्रचार के लिए भी वे पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा होंगे। चन्नी यूपी के अलावा उत्तराखंड में भी पार्टी के लिए प्रचार कर सकते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद चन्नी इसी साल 19 सितंबर को पंजाब के सीएम बने हैं।
टाउन हॉल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे चन्नी
एससी सीट के एक भावी उम्मीदवार ने बताया ‘एससी वर्ग के युवाओं में चन्नी साहब काफी फेमस हो गए हैं। इसी बात को देखते हुए प्रियंका गांधी ने उन्हें यूपी चुनाव में अपना समय देने को कहा है। हालांकि उसी समय पंजाब में भी चुनाव हो रहे होंगे, जाहिर है सीएम साहब व्यस्त रहेंगे। लेकिन फिर भी वे यहां आने को तैयार हो गए हैं। टाउन हॉल कार्यक्रमों के जरिए वे युवाओं से रुबरु होंगे। हमारे क्षेत्र में जल्दी ही उनका कार्यक्रम होगा।’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
जिसने 65 फीसदी आरक्षित सीटें जीत लीं उसकी सरकार बनी
दरअसल कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता का रास्ता अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों से होकर जाता है। माना जाता है कि इन सीटों में से 65 फीसदी से अधिक सीटें जिस पार्टी ने जीत ली वह यूपी में सरकार बना सकती है। उदाहरण के लिए 2012 के चुनाव में विधानसभा में एससी की 85 सीटें थीं। उस चुनाव में सपा ने 58, बसपा ने 15, कांग्रेस ने चार और भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं। सपा को करीब 68 फीसदी सीटों पर जीत मिली और अखिलेश यादव ने अपनी सरकार बनाई।
इसी तरह 2017 के चुनाव में आरक्षित सीटों की संख्या 86 हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहली बार दो सीटें अनसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई थीं। यह दोनों सीटें सोनभद्र जिले की हैं। भाजपा ने 70 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा को 69 एससी और एसटी की एक सीट मिली थी।
पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी
- फोटो : ANI
एससी सीटों पर पहुंची चन्नी की लोकप्रियता
इसलिए तमाम पार्टी इन वर्गों को लुभाने की कवायद कर रही है। एससी वर्ग के मतदाताओं के बीच कांग्रेस नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री की लोकप्रियता पहुंच चुकी है इसलिए कांग्रेस नेता चाहते हैं कि चन्नी के ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम यूपी मे कराएं जाएं। हालांकि, पंजाब में सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही कांग्रेस की यूपी चुनाव में अन्य पार्टियों से पीछे नजर आ रही है लेकिन पार्टी को उम्मीद है कि कुछ एससी सीटों पर चन्नी प्रभावी हो सकते हैं।
यूपी के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक यूपी चुनाव में हम जरूर इस बात को लेकर जाएंगे कि कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बनाकर इस समुदाय को आगे बढा़ने का काम किया है।
खुद को दलितों का हितैषी कहने वाली पार्टियां कहती कुछ हैं और करती कुछ और, लेकिन हमारे शीर्ष नेतृत्व ने यह करके दिखाया है।
बसपा प्रमुख मायावती।
- फोटो : अमर उजाला
यूपी में दलित वोटर
उत्तर प्रदेश में एससी आबादी का लगभग 21 प्रतिशत हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को केवल 10-12 प्रतिशत दलित वोट ही मिलते थे। राजनीतिक पर्यवेक्षक यह मानते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी-लहर की वजह से मायावती का पारंपरिक दलित वोट बैंक भाजपा की तरफ खिसक गया। इस साल एससी के लिए आरक्षित 17 सीटों में से सभी सीटें भाजपा ने जीत ली थी।
2019 के चुनाव में एससी के लिए सुरक्षित 17 सीटों में से भाजपा के खाते में 15 सीटें आईं। बताया जाता है कि दलितों में ‘अति दलित’ जातियां भाजपा की ओर चली गईं। इसी बीच 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव आया। इस चुनाव में भाजपा ने विधानसभा की 403 सीटों में से 312 सीटें जीत लीं।
चन्नी बनें सीएम, बेचैन हुई भाजपा-बसपा
जाहिर है चन्नी को पंजाब का सीएम बनाए जाने के बाद से सबसे ज्यादा बेचैनी बसपा और भाजपा में हुई। मायावती, जो यूपी में दलित-ब्राह्ण गठजोड़ से चुनाव जीतने के लिए जोर लगा रही हैं वहीं पंजाब में भी उसने अकाली दल के साथ गठबंधन किया है। वहीं बार गैर-जाटव दलितों ने ज्यादातर भाजपा के साथ गठबंधन किया है। 2017 के चुनाव में भी दलित वोट को पाने के लिए भाजपा और बसपा में खूब जोर आजमाइश हुई थी। खासकर गैर जाटव वोट पाने के लिए दोनों पार्टियों ने जोर लगाया था। चन्नी के जरिए कांग्रेस इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।