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UP Chunav 2022: लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे आरपीएन सिंह भाजपा के लिए कितने उपयोगी साबित होंगे?

अमित शर्मा
Updated Tue, 25 Jan 2022 06:58 PM IST

सार

केंद्रीय मंत्री रहने के बाद मोदी लहर में हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में वे कुशीनगर लोकसभा सीट हार चुके हैं। कुशीनगर से भाजपा के राजेश पांडेय के 3.70 लाख वोटों के मुकाबले उन्हें 2.84 लाख वोट हासिल हुए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोटों का यह अंतर और बढ़ गया...
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भाजपा में शामिल होते हुए आरपीएन सिंह - फोटो : Agency


वे स्वयं पड़रौना विधानसभा चुनाव भी हार चुके हैं। इतना ही नहीं, आरपीएन सिंह अपनी मां मोहिनी देवी को भी जीत दिलवाने में नाकाम साबित हुए थे। उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था।   


हालांकि, भाजपा में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि यह उनकी नई पारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की प्राचीन संस्कृति को गौरव दिलाने का काम किया है। पूरे देश के साथ-साथ पूर्वांचल में विकास की धारा बह रही है। वे भी भाजपा के साथ जुड़कर जनता के हितों की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं। पार्टी में शामिल होते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार भी जताया।  

पूर्वांचल में पार्टी को मिलेगा लाभ

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि आज पूरे देश में जो भी राष्ट्रवाद की राजनीति करना चाहता है और जनता के हितों के लिए काम करना चाहता है, उसके लिए भाजपा ही सबसे उपयुक्त विकल्प है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई वाली भाजपा केवल राष्ट्रवाद की राजनीति को महत्त्व देती है। उसके लिए राष्ट्र का हित ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी नीतियों पर स्वमूल्यांकन करना चाहिए कि लोग उसे छोड़कर क्यों जा रहे हैं।   

लाभ के लिए राजनीति करने वाले लोग छोड़ रहे कांग्रेस

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संघर्ष का इतिहास रहा है। यहां केवल वही नेता जनता को स्वीकार्य हुए हैं, जिन्होंने जनता के लिए संघर्ष किया है। विचारधारा को समर्पित ऐसे लोग ही पार्टी की मजबूत रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन जो नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, उनका संघर्ष का कोई इतिहास नहीं रहा है। वे केवल अपने पूर्वजों की कमाई खा रहे थे। यही कारण है कि आज जब प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस को खड़ी करने में संघर्ष कर रही हैं, इस तरह के लाभपरस्त लोग पार्टी छोड़ रहे हैं।

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