प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भाजपा के चुनाव प्रचार के लिए वर्चुअल रैली को संबोधित किया। इसके लिए पश्चिम के पांच जिलों में 7800 से अधिक स्थानों पर डिजिटल प्रोजेक्टर लगाए गए थे, जहां बैठकर लोगों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। इसके पहले समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव भी डिजिटल रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। इस तरह की रैलियों से सभी दलों के नेता मायूस बताए जा रहे हैं क्योंकि इस तरह की रैली के जरिए नेताओं को 'चाल' नहीं मिल पा रही है। नेता पार्टी के लिए हवा बनाने में भी सही भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। लेकिन इन्हीं राजनीतिक दलों के वे कार्यकर्ता डिजिटल रैली से बेहद खुश नजर आ रहे हैं जिन्हें इस तरह की रैलियों को सफल बनाने के लिए बसों का इंतजाम करने जैसी कई खर्चीली जिम्मेदारियां सौंप दी जाती थीं।
जेवर एयरपोर्ट के शिलान्यास के समय भी पश्चिमी यूपी के इसी हिस्से को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली को संबोधित किया था। इस रैली के दौरान एक नेता को दस बसों के जरिए शामली, कैराना और मुजफ्फरनगर से भाजपा समर्थकों को लाने-ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भाजपा के इस समर्थक ने अमर उजाला से कहा कि लोगों को लाने-ले जाने में भारी धन खर्च करना पड़ता है। उनके चाय-नाश्ते और भोजन की भी पूरी जिम्मेदारी उन्हें ही उठानी पड़ती है। जेवर एयरपोर्ट वाले कार्यक्रम के दौरान भी लोगों को एकत्र करने में भारी धन खर्च करना पड़ा था।
लेकिन सोमवार को आयोजित डिजिटल रैली में इन समर्थकों को कोई धन नहीं खर्च करना पड़ा। प्रोजेक्टर का काम पार्टी के माध्यम से किया गया था, तो स्थानीय लोगों के ही कार्यक्रम में आने के कारण परिवहन के नाम पर कोई खर्च नहीं हुआ। कुछ जगहों पर आने-जाने वालों के लिए नाश्ते का प्रबंध किया गया था, तो कई जगहों पर सड़कों पर खड़े होकर लोगों ने प्रोजेक्टर पर प्रधानमंत्री को सुना। इससे इन समर्थकों को धन खर्च से भारी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि भगवान करे कि अब कभी फिजिकल रैलियों का आयोजन न करना पड़े।
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से दावा किया गया है कि इस रैली के जरिए लगभग 50 हजार लोगों ने प्रधानमंत्री को सुना। इसके लिए विभिन्न स्थलों पर प्रोजेक्टर लगाने का काम किया गया था। विभिन्न नेता अलग-अलग जगहों पर उपस्थित रहकर लोगों को जोड़ने का काम करते रहे। पार्टी सांसद महेश शर्मा दादरी में तो जिलाध्यक्ष ग्रेटर नोएडा के स्थलों पर उपलब्ध रहे। हालांकि, डिजिटल रैली में लोगों को वह जोश नहीं महसूस हुआ जो उनकी फिजिकल रैलियों में हुआ करता था।
पार्टी के एक नेता ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत हैं। वे केवल अपनी अपील से पूरे चुनाव का परिदृश्य पलटने की क्षमता रखते हैं और 2014 के आम चुनाव से लेकर अब तक वे बार-बार अपनी यह प्रतिभा साबित भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय पार्टी यूपी चुनाव में कठिन स्थिति का मुकाबला कर रही है, फिजिकल रैलियों पर प्रतिबंध पार्टी की उम्मीदों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।