राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में 2017 की सरकार बनने के साथ ही सभी जाति वर्ग विशेष के लोगों को साधने के लिए लखनऊ में हाई प्रोफाइल कैबिनेट तैयार की गई। अब यही हाई प्रोफाइल कैबिनेट माहौल बनाकर लखनऊ में चुनावी बागडोर संभाले हुए है। राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर ओपी मिश्रा कहते हैं कि एक शहर से इतने मंत्रियों का कुनबा जब मैदान में होगा तो परिणाम की उम्मीद भी उसी लिहाज से पार्टी करेगी। उनका कहना है कि अब पूरा दारोमदार ऐसे लोगों पर है जिन पर सरकार ने 2017 में अपना दांव लगाया था। ऐसे में इन प्रत्याशियों के सामने न सिर्फ चुनौती है बल्कि उन्हें पांच साल में किए गए कामकाज की बदौलत खुद को बेहतर साबित करना होगा।
राजनीतिक जानकार बताते हैं 2007 में जब बसपा सरकार बनी तो लखनऊ से सिर्फ एक मंत्री बनाया गया था, उससे पहले मुलायम सिंह की 2003 की सरकार में शहर से एक भी मंत्री नहीं बना था। जबकि 2012 में अखिलेश यादव की सरकार में लखनऊ से तीन मंत्री बनाए गए थे।