उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर से चुनाव लड़ा कर भारतीय जनता पार्टी ने एक साथ कई निशाने साध लिए। गोरखपुर से चुनाव लड़ने पर योगी आदित्यनाथ न सिर्फ गोरखपुर बल्कि पूर्वांचल के तकरीबन 15 जिलों पर असर डालेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या, मथुरा और काशी के नाम पर भाजपा को जो माइलेज मिलना है वह योगी आदित्यनाथ के इन जगहों से चुनाव न लड़ने पर भी कमजोर नहीं होने वाला। बल्कि यह वह नाम है जिनके बल पर भाजपा दूसरी जगहों पर भी चुनाव जीत लेती है।
भाजपा का पूर्वांचल पर सबसे ज्यादा फोकस
शुरुआत से ही भाजपा का पूर्वांचल पर सबसे ज्यादा फोकस रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके अपने गढ़ गोरखपुर से विधानसभा चुनाव लड़ाने का एलान करके भाजपा ने वह सभी समीकरण साध लिए जिसके लिए वह शुरुआत से ही राजनीतिक गुणा-भाग लगा रही थी। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल की राजनीति को करीब से जानने वाले गोरखपुर के डॉक्टर हरगोविंद सिंह कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से चुनाव लड़ने का असर यह होगा कि पूर्वांचल के ज्यादातर जिले उनके चुनाव लड़ने के नाम से ही 'भाजपा की टोन' के हिसाब से सेट हो जाएंगे। वह कहते हैं कि इस चुनाव में भाजपा को सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि संतकबीर नगर, देवरिया, बस्ती, महाराजगंज, कुशीनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, अंबेडकर नगर और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में और मजबूती मिलेगी।
उनका कहना है यही वह इलाके हैं जहां पर भाजपा के विरोधी दल मजबूती से न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि विधानसभा में उनकी सीटें भी हैं। डॉक्टर सिंह कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने से न सिर्फ भाजपा का हिंदुत्ववादी एजेंडा सेट होगा बल्कि अपने पुराने गढ़ में चुनाव लड़ने के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश में उसी लय और वेग के साथ चुनाव प्रचार भी कर सकेंगे। उनका मानना है इस लिहाज से योगी आदित्यनाथ गोरखपुर मंडल, आजमगढ़ मंडल और बस्ती मंडल की सभी विधानसभाओं में सिर्फ चुनाव लड़ने के नाम पर ही असर डालेंगे।
भाजपा ने कर्मभूमि से चुनाव लड़ने को कहा
प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला कहते हैं कि अयोध्या, मथुरा और काशी अब किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर चुनाव लड़ने वाली जगह नहीं बची है। वे कहते हैं कि यह तो वे जगह हैं जिनके नाम पर दूसरी जगह पर भी भाजपा चुनाव जीत लेती है। इसलिए यहां पर मुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर बैठने वाले किसी भी क़दद्दावर शख्स को चुनाव लड़ाने का कोई मतलब ही नहीं बनता था। उनका कहना है कि इससे पहले अयोध्या और मथुरा के संतों ने प्रस्ताव बनाकर योगी आदित्यनाथ को दोनों जगह से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भी रखा था। लेकिन भाजपा ने आदित्यनाथ को उनकी उस कर्मभूमि में चुनाव लड़ने के लिए भेजा। शुक्ला कहते हैं कि अयोध्या, मथुरा और काशी में भाजपा का कोई भी प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा तो वह जीत ही जाएगा। इसलिए पार्टी ने गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ा कर पूरे पूर्वांचल पर अपना निशाना साधा है।
आजमगढ़ तक पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि आजमगढ़ और मऊ में जिस तरीके से समाजवादी पार्टी, बसपा, सुभासपा समेत अन्य जातिगत समीकरणों को साधते हुए दूसरे राजनीतिक संगठन हावी होना चाह रहे थे, उससे पूर्वांचल में योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ाकर भाजपा ने सबसे सही गेंद डाली है। वे कहते हैं कि आजमगढ़ समाजवादी पार्टी का बड़ा गढ़ रहा है इसलिए योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से चुनाव लड़ने का असर वहां पर पड़ेगा। इसके अलावा मऊ और गाजीपुर समेत निषाद, केवट समेत और कई अन्य पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के इलाकों में भी योगी आदित्यनाथ का चुनाव लड़ने वाला कार्ड सटीक बैठेगा।