उत्तर प्रदेश में चुनावों की तारीख नजदीक आते ही कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को एक बड़ा टास्क दे दिया है। अब कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को '10 दिसंबरी प्लान' देकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बाजी पलटने की तैयारी की है। इस योजना के तहत कांग्रेस ने महज 10 दिसंबर तक एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य अपने कार्यकर्ताओं को दिया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक पार्टी ने संविधान दिवस पर दिए इस लक्ष्य से महज 15 दिन के भीतर पूरे उत्तर प्रदेश को भेदने की तैयारी की है। वहीं विपक्ष ने चुनाव की तारीख घोषित होने से कुछ दिन पहले सदस्यता अभियान चलाए जाने पर कांग्रेस की रणनीति पर ही सवाल उठा दिए हैं।
बीते तीन दशकों से उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर कांग्रेस पार्टी कुर्सी पाने के लिए वह सभी दांव पर चल रही है, जिससे उसकी न सिर्फ सरकार बने, बल्कि उत्तर प्रदेश की भावी सरकार में उसकी सहभागिता भी हो। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कहते हैं कि कांग्रेस ने ग्राम पंचायत स्तर पर घर-घर सदस्य बनाने का महा अभियान शुरू कर दिया है। महज 15 दिन के भीतर उनकी पार्टी 'एक परिवार, नए सदस्य चार' के नारे के साथ एक करोड़ नए सदस्य बनाएगी। पार्टी के मुताबिक इस अभियान के तहत हर विधानसभा में नगर पंचायतों या वार्डों के आधार पर पांच सदस्यीय टीमों का गठन होगा। हर टीम का एक प्रभारी होगा। प्रदेश में लगभग 23000 सदस्यता प्रभारी बनाये जायेंगे। प्रत्येक सदस्य को रोज 25 नए सदस्य बनाने का जिम्मा दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के चुनाव में जातिगत समीकरणों को साधने हुए सभी राजनीतिक पार्टियां ब्राह्मण, दलित और पिछड़े वर्ग को शुरुआत से ही फोकस करती हुई आई हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि ब्राह्मण, दलित और पिछड़ा वर्ग शुरुआत से ही कांग्रेस का वोटर रहा है। कुछ वजह से यह लोग कांग्रेस से दूर जरूर हुए लेकिन इनका जुड़ाव अभी भी पार्टी में बना हुआ है। इसी वजह से कांग्रेस आलाकमान ने संविधान दिवस से एक नई शुरुआत की है। इसके तहत कांग्रेस के पदाधिकारी गांव-गांव जाकर भीम चर्चा करेंगे। जिसमें भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण के योगदान पर न सिर्फ चर्चा की जाएगी बल्कि दलितों के उत्थान के लिए कांग्रेस पार्टी के किए गए प्रयासों के बारे में भी बताया जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता प्रोफेसर सुमित जैन कहते हैं कि सभी राजनीतिक पार्टियां जातियों की साधने की जुगत में लगी रहती हैं। वह कहते हैं कि जो काम कांग्रेस कर रही है, वही काम तो भारतीय जनता पार्टी और दूसरे अन्य दल भी करते ही आ रहे हैं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर जाति विशेष को फोकस करके चुनाव लड़ने पर राजनीतिक दलों का फायदा होता है। यही वजह है कि चुनाव के दौरान जाति विशेष का नाम लेकर पार्टियां न सिर्फ संगठन की इकाइयां बनाती हैं, बल्कि उनसे जुड़े लोगों को आगे करके और उनके बीच जाकर अपने वोट बैंक को मजबूत करती हैं।