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उत्तर प्रदेश चुनाव: कांग्रेस के लिए सीएम फेस से ज्यादा जरूरी है ऐसे 'चेहरे' का होना, क्या प्रियंका उसमें होंगी फिट?

सार

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि चुनाव सिर्फ उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहा है। देश के पांच राज्यों में चुनाव हो रहा है। कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी की सक्रियता सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में ही है। इसलिए इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी सबसे बड़ा चेहरा हैं...
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प्रियंका गांधी और राहुल गांधी - फोटो : Agency
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा हैं या नहीं, इस बात पर लगातार बहस चलती आ रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में तीन दशक से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस के लिए किसी नेता को बतौर मुख्यमंत्री चेहरा पेश करना बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती एक बड़े चेहरे के साथ राजनीतिक हलचल पैदा करना है। इसमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को आगे करके निश्चित तौर सत्ता से बाहर बैठी हुई कांग्रेस में हलचल पैदा की है। अब इसके राजनीतिक नफा नुकसान के आकलन 2022 के चुनावों के बाद हो सकेगा।

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कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को इशारों में यह बात जरूर कही कि उत्तर प्रदेश में उनका ही चेहरा सबसे आगे है। लेकिन प्रियंका गांधी ने खुलकर इस बात को नहीं कहा कि वह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं। उत्तर प्रदेश में राजनीति के जानकार प्रियंका गांधी के इस जवाब में कई मायने निकाल रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व प्रवक्ता आरएन सिंह कहते हैं कि प्रियंका गांधी ने पूछे गए सवाल का जो जवाब दिया वह डिप्लोमैटिकली बिल्कुल सही है। वह कहते हैं कि प्रियंका गांधी के जवाब को अगर आप विस्तार में समझेंगे तो आप पाएंगे कि उन्होंने अपने चेहरे को सबसे आगे रखे जाने या सबसे ज्यादा दिखने वाले चेहरे के तौर पर हामी भरी है। वह कहते हैं जो चेहरा सबसे आगे हो वही चेहरा मुख्यमंत्री का हो, ऐसा नहीं होता है।

जमीन पर नई ऊर्जा पैदा कर रही हैं प्रियंका

सिंह का कहना है कि दरअसल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जो हालत है, उसमें मुख्यमंत्री के चेहरे से ज्यादा कांग्रेस के एक बड़े कद्दावर राजनीतिक चेहरे को सामने रखने की जरूरत है। ताकि उत्तर प्रदेश की कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ताओं में हलचल पैदा हो और उसके साथ संगठन को मजबूती मिल सके। उनका कहना है कि इस बात में कहीं पर से कोई दो राय नहीं है कि आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस उतनी मजबूत नहीं है, जितने अन्य प्रमुख राजनीतिक दल। इस बात को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानते भी हैं। यही वजह है कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा वक्त से न सिर्फ राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं, बल्कि जमीन पर जाकर आंदोलन करके संगठन में नई ऊर्जा भी पैदा कर रही हैं।

पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करना जरूरी

उत्तर प्रदेश में राजनीति के जानकार डॉ. पीएन सिंह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी संगठन और कार्यकर्ताओं में हलचल पैदा करके जमीनी स्तर पर खड़ा करना था। क्योंकि जो पार्टी तकरीबन तीस साल से सत्ता से बेदखल हो उसके लिए सबसे बड़ी बुनियादी जरूरत यही होती है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जिस तरीके की राजनीति और नेताओं के बीच छत्तीस के आंकड़े थे, उन्हें दूर करके चुनाव से पहले सब कुछ व्यवस्थित करना भी आवश्यक था। पीएन सिंह कहते हैं कि कांग्रेस को चुनाव से पहले इन सब चीजों पर ध्यान देना था, जो उन्होंने दिया भी। फिर बारी आती है मजबूत संगठन के साथ एक मुख्यमंत्री के चेहरे की। वह कहते हैं कि जिस तरीके से फ्रंट फुट पर प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए बैटिंग कर रही थीं, उसमें मुख्यमंत्री का चेहरा सेकंडरी हो जाता है। इस बात का अहसास कांग्रेस पार्टी को भी है। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने खुलकर अभी तक किसी नेता का नाम उत्तर प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री आगे नहीं किया है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि चुनाव सिर्फ उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहा है। देश के पांच राज्यों में चुनाव हो रहा है। कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी की सक्रियता सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में ही है। इसलिए इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी सबसे बड़ा चेहरा हैं। वे मानते हैं कि प्रियंका गांधी के सक्रिय होने से उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में सक्रियता बढ़ी है।

उत्तर प्रदेश में लड़ाई में नहीं है कांग्रेस

राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि जब आप नजदीकी लड़ाई में हों, तो आपके हर कदम आपके लिए निर्णायक साबित होते हैं। वे कहते हैं उत्तर प्रदेश कांग्रेस और पंजाब में कांग्रेस की स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर है। उनका कहना है पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा सामने रखने से कांग्रेस के वोट बैंक में इजाफा हो सकता है। लेकिन उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा रखने से कोई बहुत खास फर्क नहीं पड़ने वाला। हां, अगर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पहले और दूसरे नंबर की लड़ाई में होती तो निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री का चेहरा बहुत मायने रखता। लेकिन कांग्रेस ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश में नहीं है। इसलिए कांग्रेस मुख्यमंत्री के चेहरे की बजाय सबसे बड़ा चेहरा सामने रखकर चुनावी मैदान में है। जो राजनीतिक तौर पर कांग्रेस के भविष्य के लिए बेहतर भी है।

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