उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फिर से जीत का परचम लहराने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी लगातार नई-नई रणनीतियों पर काम कर रही है। पार्टी के नेता डोर-टू-डोर कैंपेन के साथ ही वचुर्अल रैली का भी सहारा ले रहे हैं। अब भाजपा ने मध्यप्रदेश के मॉडल को अपने चुनावी कैंपेन का आधार बनाया है। एमपी में विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा ने जो चुनावी फार्मूला अपनाया था, उसे ही फिर से यूपी के चुनाव में आजमाया जा रहा है। मध्यप्रदेश की ही तरह यहां भी पहले की सरकारों और भाजपा सरकार के दौरान किए गए कामों के फर्क के साथ ही 'कमल शक्ति संवाद अभियान' और 'सुझाव आपका संकल्प हमारा' जैसे चुनावी टैग लाइन को फोकस किया जा रहा है।
इस चुनावी अभियान की मुख्य टैगलाइन 'फर्क है' के तहत मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार के पांच साल के कामकाज की तुलना पिछली सपा सरकार के दौरान हुए कामों से करने की रणनीति पर भाजपा फोकस करेगी। इसमें अपराधियों पर अंकुश, तुष्टिकरण का खात्मा, राम मंदिर निर्माण कार्य और विश्वनाथ मंदिर के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए पिछली सरकार के रवैए की तुलना की जा रही है। इसके अलावा सरकार के कार्यों और प्राथमिकताओं को बताते हुए मौजूदा सरकार की उपलब्धियों पर भी फोकस किया जा रहा है। इन्हीं पंच लाइन का सहारा लेकर मध्यप्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार की नाकामियां बताते हुए अपनी उपलब्धियों का जोर-शोर से बखान किया था।
चुनाव की दूसरी टैग लाइन 'कमल शक्ति संवाद अभियान' के तहत पार्टी ने बूथ से लेकर जिला स्तर पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद का सिलसिला शुरू किया है। महिलाओं से संवाद कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि योगी सरकार ने शिक्षा स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर जो नए काम किए हैं, उन उपलब्धियों को महिला, युवा, किसान और समाज के अन्य प्रबुद्ध वर्गों के बीच जाकर संवाद का सिलसिला चलाया जा रहा है। इसके लिए छोटी छोटी टोलियां को लगाया गया है।
मध्यप्रदेश में भाजपा ने चुनावी संकल्प पत्र अर्थात घोषणा पत्र बनाने के लिए सभी जिलों में जाकर लोगों से सुझाव मांगे थे। इसमें कई वरिष्ठ नेताओं का लगाया गया था, जिन्होंने विभिन्न वर्गों से चर्चा कर यह जानने की कोशिश की थी कि घोषणा पत्र में किन मुद्दों को शामिल किया जाए। अब यही प्रयोग यूपी के चुनाव में भी अपनाया जा रहा है। समाज के सभी वर्गों के मतदाताओं के बीच जाकर क्षेत्रीय नेता ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार की प्राथमिकता क्या हो, किन कार्यों को घोषणा पत्र में शामिल किया जाए और जनता की उम्मीदें क्या हैं। ऐसे तमाम बिंदुओं को सुझाव के तौर पर मांगा जा रहा है।
भाजपा विधानसभा चुनाव के लिए पांच फरवरी को अपना घोषणा पत्र जारी करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में घोषणा पत्र जारी किया जाएगा। घोषणा पत्र में शिक्षा के साथ युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर फोकस किया जाएगा। वहीं किसानों की आय दोगुनी करने, किसानों को कृषि से जुड़े मामलों में रियायत देने जैसे मामलों को भी शामिल किया जा सकता है।