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यूपी विधानसभा चुनाव: अकेले मैदान में उतरेगी जदयू, सीट शेयरिंग पर भाजपा से नहीं बनी बात 

Sat, 15 Jan 2022 10:37 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जदयू ने तीन दर्जन सीटों की सूची भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सौंपी थी। जदयू 20 से कम सीटों पर लड़ने को तैयार नहीं थी।
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जेडी(यू) नेता केसी त्यागी - फोटो : ANI
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विस्तार
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यूपी विधानसभा चुनाव में जदयू अब अपने अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा से सीट शेयरिंग पर समझौता नहीं होने पर जदयू ने अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है। भाजपा-जदयू के बीच मिलकर चुनाव लड़ने की बात पर सहमति तो थी पर सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बनी जिसके बाद जदयू अकेले ही मैदान पर उतरेगी। मंगलवार को लखनऊ में पार्टी की बैठक में यह तय होगा कि जदयू कितनी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा।  

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जदयू ने भाजपा को दिया था अल्टीमेटम
केसी त्यागी ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि हम एनडीए में भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। हम चाहते हैं कि उतर प्रदेश में चुनाव लड़ें, इसको लेकर भाजपा से बातचीत भी चल रही है, लेकिन अभी तक भाजपा ने कुछ साफ नहीं किया है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद भी कुछ साफ नहीं है। 

जानकारी के मुताबिक, यूपी में एनडीए के घटक के रूप में शामिल कुछ दल उन्हीं सीटों पर लड़ना चाहते थे जिन पर जदयू लड़ना चाहती थी। जदयू ने तीन दर्जन सीटों की सूची भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सौंपी थी। जदयू 20 से कम सीटों पर लड़ने को तैयार नहीं थी। केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को जदयू नेतृत्व ने सीट शेयरिंग को ले अधिकृत किया था। जदयू नेतृत्व शुरू से ही कह रहा था कि अगर बात नहीं बनी तो जदयू अपने बूते चुनाव मैदान में उतरेगा।
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लालू के करीबी रंजन जदयू में शामिल
एक समय राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सबसे करीबी रहे पूर्व सांसद रंजन यादव शनिवार को दोबारा जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में शामिल हो गए। कभी लालू से अलग होकर रंजन ने 2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ राजद सुप्रीमो को हरा दिया था। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कोरोना प्रोटोकाल की वजह से रंजन यादव को वर्चुअल मोड के माध्यम से पार्टी में शामिल कराया। ललन ने कहा कि पूर्व सांसद रंजन यादव के जदयू में शामिल होने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। 

उन्होंने कहा, रंजन यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आस्था व्यक्त करते हुए जदयू में शामिल होने का फैसला किया है। जदयू उनके लिए कोई नई जगह नहीं। यह उनका पुराना घर रहा है। उनकी घर वापसी से पार्टी के संगठन को मजबूती मिलेगी।  

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