उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। मौर्य की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात हुई है और माना जा रहा है कि वह सपा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, भाजपा विधायक रोशन लाल वर्मा, भगवती सागर, बृजेश प्रजापति, ममतेश शाक्य, विनय शाक्य, धर्मेंद्र शाक्य और नीरज मौर्य ने भी पार्टी पद से इस्तीफा देने का एलान किया है। रोशन लाल वर्मा ही स्वामी प्रसाद मौर्य का इस्तीफा लेकर राजभवन गए थे। कहा जा रहा है ये सभी नेता सपा में शामिल हो सकते हैं।
मौर्य का प्रभाव कैसा?
बताया जा रहा है कि मौर्य का टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा नेतृत्व से विवाद चल रहा था। मौर्य जिस जाति से ताल्लुक रखते हैं वो यादव और कुर्मियों के बाद यूपी का तीसरा सबसे बड़ा जाति समूह है। ये गैर यादव ओबीसी पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं और कच्छी, मौर्य, कुशवाहा, सैनी और शाक्य के उपनामों से जाने जाते हैं। यूपी में इनकी आबादी करीब आठ फीसदी के आसपास है। करीब 100 विधानसभा सीटों पर इस जाति का प्रभाव माना जाता है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते स्वामी प्रसाद मौर्य (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। मौर्य की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात हुई है और माना जा रहा है कि वह सपा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, भाजपा विधायक रोशन लाल वर्मा, भगवती सागर, बृजेश प्रजापति, ममतेश शाक्य, विनय शाक्य, धर्मेंद्र शाक्य और नीरज मौर्य ने भी पार्टी पद से इस्तीफा देने का एलान किया है। रोशन लाल वर्मा ही स्वामी प्रसाद मौर्य का इस्तीफा लेकर राजभवन गए थे। कहा जा रहा है ये सभी नेता सपा में शामिल हो सकते हैं।
मौर्य का प्रभाव कैसा?
बताया जा रहा है कि मौर्य का टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा नेतृत्व से विवाद चल रहा था। मौर्य जिस जाति से ताल्लुक रखते हैं वो यादव और कुर्मियों के बाद यूपी का तीसरा सबसे बड़ा जाति समूह है। ये गैर यादव ओबीसी पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं और कच्छी, मौर्य, कुशवाहा, सैनी और शाक्य के उपनामों से जाने जाते हैं। यूपी में इनकी आबादी करीब आठ फीसदी के आसपास है। करीब 100 विधानसभा सीटों पर इस जाति का प्रभाव माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते योगी आदित्यनाथ
- फोटो : प्रयागराज
कभी बसपा स्वामी प्रसाद के जरिये इन्हीं लोगों को आकर्षित करती थी, यही काम भाजपा कर रही थी और अब यही उम्मीद सपा करेगी। मौर्य जब बसपा में थे तब भी वे गैर यादव ओबीसी के वोटों के लिए बसपा के सबसे मजबूत नेता थे। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषक मानते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग के बड़े और असरदार नेता हैं और इस तरह चुनाव से पहले यदि वे सपा में शामिल होते हैं तो भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
भाजपा के लिए कितना बड़ा झटका?
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के निदेशक और राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार मानते हैं कि निश्चित तौर पर यह भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। क्योंकि 2014-2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें या 2017 के विधानसभा चुनाव की, भाजपा के जबरदस्त प्रदर्शन और उसे सत्ता में लाने के पीछे गैर यादव ओबीसी वोट बैंक का योगदान रहा था।
भाजपा ने इस वर्ग में अपनी खूब बढ़त बनाई थी। भाजपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी वोट 61 फीसदी मिला था, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 74 फीसदी था। जबकि इसके मुकाबले दोनों चुनाव में सपा को इस वर्ग के बेहद कम वोट मिले थे।
स्वामी प्रसाद मौर्य अखिलेश यादव से मिले
- फोटो : अखिलेश के ट्विटर अकाउंट से
सपा के लिए भाजपा के वोट बैंक पर चोट जरूरी था
संजय कुमार मानते हैं कि यह चुनाव जीतने के लिए समाजवादी पार्टी के लिए जरूरी था कि वह भाजपा के गैर यादव ओबीसी वोट बैंक पर चोट करें। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर के साथ गठबंधन करना इसलिए भी सपा के लिए महत्वपूर्ण है। इससे लोअर ओबीसी वोट में दरार आएगी। स्वामी प्रसाद मौर्य का साथ मिलने से गैर यादव ओबीसी के मामले में सपा का हाथ मजबूत होगा।
पूरा कुनबा जाएगा तो एक लहर दिखेगी
उनके मुताबिक स्वामी प्रसाद मौर्य पिछड़ी जाति के दमदार नेताओं में एक हैं और पूर्वांचल में उनका अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। पिछड़ी जातियों के सहारे एक वोट परसेप्शन बनता है। ऐसे में मौर्य और उनके समर्थक विधायकों के सपा में जाने से अखिलेश के पक्ष में माहौल बन सकता है। क्योंकि आमतौर पर यह कहा जाता है कि नेता जिस पार्टी में जाने लगें, समझिए उसकी हवा बन रही है यानी उस पार्टी के पक्ष में माहौल बनने में मदद होती है। यदि इस तरह नेता पाला बदल कर समाजवादी पार्टी में जाने लगें तो यह सपा के पक्ष में हवा बनाने में मददगार होगी।
स्वामी प्रसाद मौर्य व अन्य
- फोटो : a
फ्लोटिंग वोटर्स पर सबसे ज्यादा असर
संजय कुमार कहते हैं जिस पार्टी में सबसे ज्यादा नेता शामिल होते हैं, वे फ्लोटिंग वोटर्स पर अपना असर डालते हैं। फ्लोटिंग वोटर्स वो हैं जो आखरी आखरी वक्त में माहौल देखकर अपना मन बनाते हैं। इन वोटर्स का झुकाव उस पार्टी की तरफ होता है जिसके जीतने की संभावना बन रही होती है। उनके मुताबिक पिछले चुनाव में 25 फीसदी फ्लोटिंग वोर्टर्स रहे हैं। इस लिहाज से यदि आने वाले समय में और भी नेता सपा में शामिल होते हैं तो इससे पार्टी को काफी फायदा हो सकता है। यह पूरे चुनावी समीकरण को बदल सकता है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
सपा की आंधी चलने का दावा
वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व मंत्री आईपी सिंह ने सपा की आंधी चलने का दावा करते हुए भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने ट्विटर के जरिए कहा है, 'ओमप्रकाश राजभर जी, जयंत चौधरी जी, राजमाता कृष्णा पटेल जी,संजय चौहान जी और अब स्वामीप्रसाद मौर्य जी समाजवादी पार्टी के साथ हैं। मैंने भाजपा मुख्यालय पर एक ताला तोहफे के रूप में भेज दिया है। 10 मार्च के बाद लगा कर घर लौट जाइएगा, लहर नहीं सपा की आंधी चल रही है।