कांग्रेस की चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख पीएल पुनिया ने रविवार को कहा कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान का चेहरा होंगी। उन्होंने कहा कि प्रियंका राज्य में सबसे लोकप्रिय राजनीतिक शख्सियत हैं। वहीं हमारा एक चेहरा होंगी, जिनके इर्द-गिर्द पूरा चुनाव प्रचार अभियान चलेगा। पुनिया के इस जोश भरे बयान का क्या यह मतलब निकाला जाए कि प्रियंका गांधी के चुनाव में मुख्य चेहरा बनने से कांग्रेस को इसका फायदा होगा? सवाल यह भी है कि क्या जो काम 2017 में राहुल गांधी नहीं कर पाए 2022 में प्रियंका गांधी उसे पूरा कर सकेंगी।
कांग्रेस की यूपी में आखिरी बार सरकार 1985 से 1989 के बीच रही जब एनडी तिवारी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। तब से लेकर अब तक कांग्रेस यूपी में सत्ता से बाहर है और पार्टी का ग्राफ प्रदेश में गिरता ही जा रहा है। पिछले चुनाव में राहुल गांधी ने चुनाव अभियान की बागडोर संभाली हुई थी और पार्टी ने 2017 का चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में पार्टी ने मुंह की खाई। उसका वोट शेयर 6.2 प्रतिशत था और सिर्फ सात सीटों पर संतोष करना पड़ा।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुर्खियां जरूर बटोर ली हैं, लेकिन अभी कांग्रेस संगठन का जो हाल है उस आधार पर कोई चमत्कार का हो जाना या सरकार बनाने की हैसियत में आ जाने की बात हास्यास्पद लगती है। इतना जरूर है कि प्रियंका मायावती के वोट बैंक में कुछ सेंध लगा सकती है और पार्टी का वोट शेयर थोड़ा बढ़ सकता है।
बनारस में हुई रैली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस की चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख पीएल पुनिया ने रविवार को कहा कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान का चेहरा होंगी। उन्होंने कहा कि प्रियंका राज्य में सबसे लोकप्रिय राजनीतिक शख्सियत हैं। वहीं हमारा एक चेहरा होंगी, जिनके इर्द-गिर्द पूरा चुनाव प्रचार अभियान चलेगा। पुनिया के इस जोश भरे बयान का क्या यह मतलब निकाला जाए कि प्रियंका गांधी के चुनाव में मुख्य चेहरा बनने से कांग्रेस को इसका फायदा होगा? सवाल यह भी है कि क्या जो काम 2017 में राहुल गांधी नहीं कर पाए 2022 में प्रियंका गांधी उसे पूरा कर सकेंगी।
कांग्रेस की यूपी में आखिरी बार सरकार 1985 से 1989 के बीच रही जब एनडी तिवारी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। तब से लेकर अब तक कांग्रेस यूपी में सत्ता से बाहर है और पार्टी का ग्राफ प्रदेश में गिरता ही जा रहा है। पिछले चुनाव में राहुल गांधी ने चुनाव अभियान की बागडोर संभाली हुई थी और पार्टी ने 2017 का चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में पार्टी ने मुंह की खाई। उसका वोट शेयर 6.2 प्रतिशत था और सिर्फ सात सीटों पर संतोष करना पड़ा।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुर्खियां जरूर बटोर ली हैं, लेकिन अभी कांग्रेस संगठन का जो हाल है उस आधार पर कोई चमत्कार का हो जाना या सरकार बनाने की हैसियत में आ जाने की बात हास्यास्पद लगती है। इतना जरूर है कि प्रियंका मायावती के वोट बैंक में कुछ सेंध लगा सकती है और पार्टी का वोट शेयर थोड़ा बढ़ सकता है।
प्रियंका गांधी
- फोटो : amar ujala
प्रियंका गांधी ने आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। वे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ लगातार आक्रमक तेवर अपनाए हुई हैं। हाल ही में वाराणसी में खुद को हिंदुत्व के ब्रांड के तौर पर पेश करने का भी प्रयास किया। उससे पहले लखीमपुर खीरी कांड को लेकर अपने 60 घंटे की हिरासत के दौरान, वे सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सुर्खियों में बनी रहीं।
एक वीडियो में वे पुलिस गेस्ट हाउस के फर्श पर झाड़ू लगाते हुए दिख रही थीं। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका के इस वीडियो के वायरल होने के बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच फोन पर बातचीत हुई और उन्हें पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया।
मीडिया और जनता में कांग्रेस की बात होने लगी
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रियंका गांधी के यूपी में नेतृत्व करने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि उन्होंने पार्टी को जिंदा कर दिया है। चाहे हाथरस हो या लखीमपुर खीरी की घटना उन्होंने जिस तरह का आक्रमक रुख अपनाया उसे लेकर उन्हें जो प्रचार मिल रहा है उससे पार्टी की बात मीडिया और जनता में होने लगी है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि मीडिया और जनता में बात होने चुनाव में कितना फायदा मिलता है क्योंकि प्रियंका गांधी की सक्रियता के बावजूद यूपी में कांग्रेस का कमजोर संगठन पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती है।
लखीमपुर खीरी कांड में मारे गए लोगों की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुईं प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
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प्रियंका ने साबित की अपनी नेतृत्व क्षमता
उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान करते हैं निश्चित तौर पर कांग्रेस प्रियंका के चेहरे पर ही चुनाव लड़ रही है और लखीमपुर खीरी कांड के दौरान प्रियंका ने जिस तरह के तेवर दिखाए हैं। उससे कांग्रेस को जरूर फायदा होगा। मुझे भी पहले लगता था कि वे यूपी आती हैं और शक्ल दिखा कर चली जाती हैं।
प्रधान मानते हैं कि पहली बार उन्होंने साबित किया कि उनमें नेतृत्व क्षमता है। उन्होंने हिम्मत दिखाई। इस घटना के दौरान उनका जो रूप दिखा है वैसा जुझारूपन बहुत कम नेताओं में है। लेकिन समस्या यह है कि कांग्रेस को नेता तो मिल गया है लेकिन उसके पास अभी संगठन नहीं है, जबकि अखिलेश के पास संगठन था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई।
लखीमपुर खीरी कांड से कांग्रेस को कितना फायदा?
हालांकि सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार एक अलग राय रखते हैं। उनका मानना है कि भले ही कांग्रेस प्रियंका के चेहरे पर चुनाव लड़े या किसी और के कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होने वाला है। खासतौर पर लखीमपुर खीरी कांड को लेकर प्रियंका की आक्रमकता के संदर्भ में अक्सर यह पूछा जाता है कि चुनाव में पार्टी को इससे क्या मिलने वाला है। दरअसल जमीनी स्तर पर कांग्रेस का संगठन ही नहीं बचा है। फिर सवाल है कि क्या जब तक चुनाव होंगे यह मुद्दा जीवंत रहेगा? हालांकि यह सच है कि प्रियंका को सबसे ज्यादा समर्थन इस बार ही मिला है।
प्रियंका गांधी
- फोटो : amar ujala
पार्टी के जिंदा होने का मतलब सरकार बनाना नहीं है
वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान एक और महत्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाते हैं। उनका कहना है कि प्रियंका गांधी ने बेशक पार्टी में नई जान फूंक दी लेकिन कांग्रेस यूपी में सरकार बना लेगी यह सोचना भी हास्पयापद है। क्योंकि प्रदेश में अभी तक तो कांग्रेस की कोई गिनती नहीं थी। लखीमपुर खीरी कांड के बाद प्रियंका गांधी ने मरी हुई कांग्रेस को जिंदा कर दिया। लेकिन जिंदा होने का मतलब यह नहीं कि कांग्रेस सरकार बनाएगी।
तिनका-तिनका इकट्ठा करके संगठन बटोरा
प्रियंका गांधी को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी महासचिव बनाया गया। जब उन्हें प्रदेश का जिम्मा मिला, पार्टी संगठन के नाम पर शून्य थी। संगठनात्मक रूप से, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई थी। प्रियंका गांधी ने अपनी यात्रा के दौरान भीड़ खींची है और पार्टी कैडर को जुटाने में सफल रही हैं। यहां तक कि राज्य के शीर्ष नेता भी जमीनी स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं की तरह मैदान में उतरे हैं। पार्टी के एक अन्य नेता के मुताबिक उन्होंने तिनका-तिनका इकट्ठा करके संगठन को बटोरा है। संगठन शून्य था लेकिन अब न्याय पंचायत तक हमारा संगठन पहुंच गया है, जल्दी ही ग्राम पंचायत तक पहुंच जाएंगे।
प्रियंका गांधी ने महिला सिपाही को गले लगाया
- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं से कर रही हैं खास कनेक्ट
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव शमीना शफीक बताती हैं कि ज्यादातर कार्यकर्ता उन्हें (प्रियंका गांधी को) दीदी कहकर बुलाते हैं। दीदी में महिलाओं को जोड़ने की जबरदस्त नेतृत्व क्षमता है। हाथरस की घटना हो या जिला पंचायत चुनाव में सपा महिला कार्यकर्ता के साथ हुए दुर्व्यवहार का वे महिलाओं के अत्याचार और उनकी सुरक्षा से जुड़ी हर बात को उठाती हैं। इसलिए महिलाएं उनके साथ आसानी से जुड़ जाती हैं। गांव-गांव तक महिलाएं उनके नेतृत्व में भरोसा करने लगी हैं। वे व्यक्तिगत तौर पर महिलाओं से मिलती हैं। उनके साथ फोटो भी खिंचवाती हैं।
शफीक ने बताया कि प्रियंका कल लखनऊ में प्रदेश भर की महिलाओं से बात करने वाली हैं। प्रदेश भर से महिलाएं उनसे मिलने पहुंच रही है। इसकी एक वजह यह है कि महिला कार्यकर्ताओं से बहुत संवेदनशीलता से बात करती हैं, उनके क्षेत्र की समस्याएं सुनती हैं। महिलाओं की समस्याओं को जानने के लिए ही उन्होंने यूपी को पांच जोन में बांट कर महिला कांग्रेस की पांच अध्यक्ष बनाया है। प्रियंका चुनाव में अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट दिए जाने के पक्ष में है। संभावना है कि वे कल इस बारे में घोषणा कर सकती हैं।
नए-नए प्रयोग कर रही हैं प्रियंका
शरत प्रधान बताते हैं कि प्रियंका गांधी जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए नए-नए प्रयोग कर रही हैं। उन्होंने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिसका पार्टी ने कोई प्रचार नहीं किया है लेकिन जमीनी स्तर पर प्रदेश में उसकी चर्चा हो रही है। जैसे उन्होंने 20-20 पेज के चार बुकलेट बनवाकर गांवों में बंटवाया है। यह चारों बुकलेट उनकी निगरानी में बनाया गया है और बताया जा रहा है कि इसमें एक बुकलेट की सारी सामाग्री प्रियंका गांधी ने खुद लिखी और संपादित की है।
से किसान न्याय रैली के बाद जनता का अभिवादन करतीं प्रियंका गांधी।
- फोटो : अमर उजाला
प्रियंका का कैंपेन किसे सूट करता है?
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से आकर्षक गठबंधन नहीं होने के कारण, कांग्रेस विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की क्षमताओं पर बहुत हद तक निर्भर करती है। अगर प्रियंका गांधी का आक्रामक अभियान कांग्रेस के लिए काम कर जाता है, तो इससे विपक्षी खेमे में वोटों का बंटवारा हो सकता है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी रैलियों में भीड़ खींच रहे हैं, लेकिन पिछले चुनाव में उनकी पार्टी का वोट शेयर 21.8 प्रतिशत के दायरे में 'सीमित' रहा है। बसपा प्रमुख मायावती भी एक ठोस लेकिन सीमित समर्थन आधार पर निर्भर हैं जिसे पिछले चुनाव में 22.2 फीसदी वोट मिले थे. दूसरी ओर, भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है।
2012 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2017 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 25 फीसदी बढ़ा है। 2012 के चुनाव में जहां भाजपा को 15 फीसदी वोट शेयर के साथ 47 सीटें मिली थीं वहीं 2017 के चुनाव में 312 सीटों के साथ उसका वोट शेयर 39.7 फीसदी बढ़ा। कुछ विश्लेषक बताते हैं कि इस स्थिति में, यूपी चुनावों पर प्रियंका गांधी के प्रभाव से भाजपा को मदद मिल रही है क्योंकि चुनाव में उसका सीधा मुकाबला सपा से है और प्रियंका सपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
राजनीति सीख गईं
हालांकि शरत प्रधान कहते हैं कि कांग्रेस बसपा या भाजपा के वोट बैंक में ही सेंध लगा सकती है। सपा के साथ उनका कुछ अंदरुनी गठबंधन हो सकता है। क्योंकि झाडू लगाने वाले वायरल वीडियो को जब प्रतिद्वंद्वियों ने इसे 'स्टंट' और 'ड्रामा' करार दिया, तो इसके जवाब में उन्होंने झाड़ू उठाकर लखनऊ के बाल्मीकि बस्ती के एक मंदिर में नंगे पांव एक टाइल वाले फर्श की सफाई कर दी। यह सीधा-सीधा मायवती के वोट बैंक में ही सेंध है। इसके जरिए प्रियंका ने यह भी साबित किया है कि वे अब राजनीति सीख गई हैं।