मार्च 2018 का एक वाकया याद आता है। संसद भवन के अंदर समाजवादी पार्टी के सांसद लाल टोपी पहन कर आए थे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी टोपी लहराते हुए इसे भाजपा के लिए "रेड सिग्नल" और "अलार्म बेल" बताया। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव से जब यह पूछा गया कि वह और उनकी पार्टी के सदस्यों ने लाल टोपी क्यों पहनी है तो जवाब में उन्होंने कहा कि यह लाल टोपी भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में एक बार फिर इस लाल टोपी का जिक्र किया। वे यहां एम्स और खाद कारखाने का उद्घाटन करने आए थे। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी की जमकर आलोचना की। उन्होंने सपा की लाल टोपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लाल टोपी वालों को सिर्फ लाल बत्ती चाहिए, ये यूपी के लिए रेड अलर्ट है।
सियासी लड़ाई नई बात नहीं
सपा और भाजपा के बीच लाल टोपी को लेकर यह सियासी लड़ाई कोई नई बात नहीं है। 2018 में ही वामपंथियों के गढ़ त्रिपुरा में जब भाजपा ने अपनी सरकार बनाई तो इसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरोधियों से कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में "लाल झंडा" को नीचे लाने के बाद उनकी पार्टी "लाल टोपी" को भी नीचे लाएगी। कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ ने यह बयान यूपी विधानसभा में लाल टोपी पहने विधायकों को देखकर दिया था। योगी ने कहा था, ‘लाल टोपी अब काम नहीं करेगी। भगवा का समय आ गया है। भगवा विकास और उदारता का प्रतीक है’।