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सिर पर टोपी लाल: कभी सपा ने इसे भाजपा के लिए अलार्म की घंटी बताया था, क्या है इस लाल टोपी की कहानी?

प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 07 Dec 2021 08:10 PM IST

सार

सपा और भाजपा के बीच लाल टोपी को लेकर यह सियासी लड़ाई कोई नई बात नहीं है।  यूपी चुनाव की लड़ाई भी अब लाल टोपी पर आ गई है।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
मार्च 2018 का एक वाकया याद आता है। संसद भवन के अंदर समाजवादी पार्टी के सांसद लाल टोपी पहन कर आए थे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी टोपी लहराते हुए इसे भाजपा के लिए "रेड सिग्नल" और "अलार्म बेल" बताया। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव से जब यह पूछा गया कि वह और उनकी पार्टी के सदस्यों ने लाल टोपी क्यों पहनी है तो जवाब में उन्होंने कहा कि यह लाल टोपी भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में एक बार फिर इस लाल टोपी का जिक्र किया। वे यहां एम्स और खाद कारखाने का उद्घाटन करने आए थे। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी की जमकर आलोचना की। उन्होंने सपा की लाल टोपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लाल टोपी वालों को सिर्फ लाल बत्ती चाहिए, ये यूपी के लिए रेड अलर्ट है।


सियासी लड़ाई नई बात नहीं
सपा और भाजपा के बीच लाल टोपी को लेकर यह सियासी लड़ाई कोई नई बात नहीं है। 2018 में ही वामपंथियों के गढ़ त्रिपुरा में जब भाजपा ने अपनी सरकार बनाई तो इसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरोधियों से कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में "लाल झंडा" को नीचे लाने के बाद उनकी पार्टी "लाल टोपी" को भी नीचे लाएगी। कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ ने यह बयान यूपी विधानसभा में लाल टोपी पहने विधायकों को देखकर दिया था। योगी ने कहा था, ‘लाल टोपी अब काम नहीं करेगी। भगवा का समय आ गया है। भगवा विकास और उदारता का प्रतीक है’। 
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
मार्च 2018 का एक वाकया याद आता है। संसद भवन के अंदर समाजवादी पार्टी के सांसद लाल टोपी पहन कर आए थे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी टोपी लहराते हुए इसे भाजपा के लिए "रेड सिग्नल" और "अलार्म बेल" बताया। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव से जब यह पूछा गया कि वह और उनकी पार्टी के सदस्यों ने लाल टोपी क्यों पहनी है तो जवाब में उन्होंने कहा कि यह लाल टोपी भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में एक बार फिर इस लाल टोपी का जिक्र किया। वे यहां एम्स और खाद कारखाने का उद्घाटन करने आए थे। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी की जमकर आलोचना की। उन्होंने सपा की लाल टोपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लाल टोपी वालों को सिर्फ लाल बत्ती चाहिए, ये यूपी के लिए रेड अलर्ट है।

सियासी लड़ाई नई बात नहीं
सपा और भाजपा के बीच लाल टोपी को लेकर यह सियासी लड़ाई कोई नई बात नहीं है। 2018 में ही वामपंथियों के गढ़ त्रिपुरा में जब भाजपा ने अपनी सरकार बनाई तो इसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरोधियों से कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में "लाल झंडा" को नीचे लाने के बाद उनकी पार्टी "लाल टोपी" को भी नीचे लाएगी। कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ ने यह बयान यूपी विधानसभा में लाल टोपी पहने विधायकों को देखकर दिया था। योगी ने कहा था, ‘लाल टोपी अब काम नहीं करेगी। भगवा का समय आ गया है। भगवा विकास और उदारता का प्रतीक है’। 

अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
इसी साल फरवरी में, जब आदित्यनाथ ने विधानसभा में टोपी पहने हुए सपा विधायकों का उपहास किया और टोपी को 'गुंडों' से जोड़ दिया, तो अखिलेश यादव ने जवाब दिया था कि लाल क्रांति का रंग है। रंग भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। जब हम खुश, उदास या रोते हैं तो हमारे चेहरे लाल हो जाते हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि मुख्यमंत्री लाल टोपी को देखकर चिढ़ गए थे क्योंकि शायद उन्होंने बचपन में लाल मिर्च खाई थी।

सबसे पहले जेपी ने पहनी लाल टोपी
तब से राज्य में लाल और भगवा रंग के बीच एक प्रतीकात्मक लड़ाई चल रही है। सपा नेताओं का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने लंबे समय तक राजनीतिक आयोजनों या चुनावों के दौरान इस लाल टोपी को पहना। इसे जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया से जुड़ी समाजवादी राजनीति का एक आदर्श माना जाता है। बताया जाता है कि यह टोपी सबसे पहले जयप्रकाश नारायण ने पहनी थी। 

सपा से जुड़े समाजवादी शोधकर्ता मारिंदर मिश्रा ने मीडिया को दिए एक बयान में बताया था कि 1992 में जब सपा की स्थापना हुई तो लोहिया के अनुयायी रहे जनेश्वर मिश्रा, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह और अन्य लोगों ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए उन्होंने लाल 'टोपी' को अपनाया। उस समय समाजवादियों की विरोधी कांग्रेस ने सफेद टोपी पहन रखी थी। अखिलेश भी रोज लाल टोपी पहनते हैं। 

Pratapgarh News : पट्टी में आयोजित शादी समारोह में पहुंचे पूर्व सीएम अखिलेश यादव। - फोटो : प्रतापगढ़
एक अलग पहचान मिलती है
चूंकि अखिलेश यादव ने हाल के वर्षों में नियमित रूप से सार्वजनिक रूप से 'लाल टोपी' पहनना शुरू कर दिया है, इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं को भी लाल टोपी पहनने की हिदायत दी गई। अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं और मंत्रियों से कहा है कि वे सभी लाल टोपी पहनकर ही क्षेत्र में निकलें। सपा नेता अब इस लाल टोपी को ‘काम बोलता है’ यानी विकास का प्रतीक के तौर पर बताने लगे हैं।  

लंबे समय से चलन में है
हालांकि सपा नेता इस रंग को नक्सलियों और कथित "शहरी नक्सलियों" से जोड़ने वाले राजनीतिक आख्यान के चलन में होने पर कुछ नहीं कहते हैं। वे मानते हैं कि इसका इस्तेमाल लंबे समय से सपा नेता करते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भगवा बनाम लाल टोपी के बीच उत्तर प्रदेश का जनादेश बताएगा कि राज्य में किसका रंग चढ़ेगा।
 
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