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SC: चेक अनादरण मामले में अंतरिम मुआवजा अनिवार्य करना अन्यायपूर्ण, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी; जानें पूरा मामला

Sun, 17 Mar 2024 05:13 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि एनआई अधिनियम की धारा 143ए में प्रयुक्त शब्द ‘हो सकता है’ का अर्थ ‘करेगा’ के रूप में नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए धारा 143ए की उप-धारा (1) के तहत शक्ति विवेकाधीन है।  
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेक अनादरण (डिशऑनर) मामले में आरोपी के लिए दोषी ठहराए जाने से पहले शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवजा देना अनिवार्य बनाने से अन्यायपूर्ण और कठोर परिणाम होंगे। इससे निष्पक्षता और न्याय की अच्छी तरह से स्थापित अवधारणा प्रभावित होगी।

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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि एनआई अधिनियम की धारा 143ए में प्रयुक्त शब्द ‘हो सकता है’ का अर्थ ‘करेगा’ के रूप में नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए धारा 143ए की उप-धारा (1) के तहत शक्ति विवेकाधीन है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 143ए के तहत अंतरिम मुआवजा देने की शक्ति का इस्तेमाल आरोपी को दोषी ठहराए जाने से पहले भी किया जा सकता है।  यह किसी शिकायत में आरोपी के खिलाफ अंतरिम मुआवजे के भुगतान के लिए एक कठोर आदेश पारित करने का प्रावधान करता है, यहां तक कि आरोपी के अपराध पर कोई निर्णय लेने से पहले और साक्ष्य दर्ज होने से पहले भी भी इस शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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शोमा कांति  की जमानत पर फैसला सुरक्षित...
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आरोपी शोमा कांति सेन की जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सेन ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जमानत के लिए विशेष एनआईए अदालत से संपर्क करने का निर्देश दिया गया था।  

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