केन्दीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राजस्थान में फोन टैपिंग व विधायक से बातचीत के ऑडियो वायरल करने की दिल्ली पुलिस को शिकायत दी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अपराध शाखा ने केन्द्रीय मंत्री के घर पहुंचकर उनके बयान दर्ज कर लिए हैं। शिकायत के राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा व कुछ विधायकों के खिलाफ दी गई है। हालांकि इस मामले में दिल्ली पुलिस के अधिकारी अधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने से बचते रहे।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने पिछले सप्ताह तुगलक रोड थाना पुलिस को शिकायत दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई। जांच के बाद अपराध शाखा ने बृहस्पतिवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली। इससे पहले अपराध शाखा के डीसीपी जॉय टर्की ने केन्द्रीय मंत्री के अकबर रोड स्थित सरकारी आवास पर पहुंचकर बयान दर्ज किए।
कुछ महीने पहले राजस्थान विधानसभा में फोन टैपिंग का मामला गूंजा था। जिसमें आरोप लगा था कि राजस्थान सरकार वेवजह विधायकों के फोन को टेप करा उनकी निजता का हनन कर रही है। हालांकि इसके संबंध में राजस्थान सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए टैपिंग से साफ-साफ इनकार किया था। लेकिन उससे संतुष्ट नहीं होने पर केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान के अलावा दिल्ली में भी उनके फोन टेप किए गए है।
एफआईआर में राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के उस बयान को आधार बनाया गया है जिसमें धारीवाल ने माना था कि ऑडियो मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वायरल किए थे। केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने वायरल ऑडियो से अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने और मानसिक शांति भंग करने के आरोप लगाए हैं।
एफआईआर में कहा गया है कि 17 जुलाई 2020 को देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूहों ने संजय जैन और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच फोन पर हुई बातचीत के ऑडियो को प्रसारित किया। यह फोन टेपिंग बिना गृह विभाग की अनुमति के की गई। गृह विभाग के तत्कालीन एसीएसने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने फोन टेपिंग की अनुमति नहीं दी। इसका साफ अर्थ है कि गैर कानूनी तरीके से फोन टेप किए गए।
केन्द्रीय मंत्री ने अपनी आवाज होने से इंकार किया-
गौरतलब है कि जुलाई, 20 से सचिन पायलट समेत कांग्रेस के 19 विधायकों की बगावत के समय से ही फोन टेपिंग का विवाद चल रहा है। सचिन पायलट को हटाने के बाद 15 जुलाई को तीन ऑडियो टेप गहलोत खेमे की तरफ से जारी किए गए थे। उनमें गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच विधायक खरीद फरोख्त की बातचीत का दावा था। एक टेप में विश्वेंद्र सिंह की बातचीत का दावा था। इन ऑडियो टेप की सत्यता और सोर्स को लेकर ही विवाद है। शेखावत ऑडियो टेप में खुद की आवाज होने से इनकार करते रहे हैं।
राजस्थान सरकार ने विधानसभा में फोन टेपिंग की बात मानी थी-
राजस्थान सरकार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में माना था कि सक्षम स्तर के अधिकारी से मंजूरी लेकर फोन टेप किए गए थे। बाद में सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में कहा था कि किसी भी मंत्री, विधायक या जनप्रतिनिधि का फोन टेप नहीं किया गया। हथियारों और विस्फोटकों की सूचना पर गृह सचिव की अनुमति लेने के बाद दो लोगों के फोन सर्विलांस पर लिए गए थे। ये लोग सरकार गिराने, पैसे का लेन-देन करके विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की बातें कर रहे थे। उस समय जवाब देते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने माना था कि मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वीडियो वायरल किए थे। धारीवाल ने कहा था कि मुख्यमंत्री के ओएसडी केपास व्हाट्सएप पर ऑडियो आए और उन्हें किसी ग्रुप पर डाल दिए। इसमें कोई गुनाह नहीं है। भाजपा ने विधानसभा से बाहर व भीतर पूछा था कि ऑडियो कहां से आए।