केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कहा कि आईआरसी 90 साल पुराना संगठन है, जो बुनियादी ढांचों के निर्माण में तकनीकी मार्गदर्शन देता है। यह संगठन ज्ञान का स्रोत है, लेकिन अब राजनीतिक दल की तरह काम करने लगा है। यह ठीक नहीं है। पुल प्रबंधन को लेकर आयोजित सत्र में गडकरी ने कहा कि कभी-कभी मुझे लगता है आईआरसी एक राजनीतिक दल जैसा काम करता है, जबकि यह पेशेवर संगठन है।
उन्होंने कहा कि आईआरसी के पास एक प्रयोगशालाएं और एक स्थायी कार्यालय होना चाहिए। साथ ही यहां ऐसे कर्मचारियों को नियुक्त किया जाए, जिनकी शोध और तकनीक में रुचि हो। उनके ज्ञान और अनुभव का पूरा लाभ उठाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर इंडियन रोड कांग्रेस ऐसा करने के लिए इच्छुक है तो वह उनको जमीन और अनुदान दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन आईआरसी को स्वतंत्र, निष्पक्ष और अच्छा संगठन बनना होगा। मुझे लगता है कि कर्नाटक समेत सभी राज्य सरकारें में इसमें मदद करेंगीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर गुणवत्तापूर्ण काम करना है तो संगठन का सरकारी ढांचे से स्वतंत्र होना बेहद जरूरी है। क्योंकि सरकार के काम करने के तरीके में बॉस हमेशा सही होता है, चाहे वह अच्छे या बुरे फैसले ले रहा हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा तकनीक के लिए गुणवत्तापूर्ण विकल्पों की खासी जरूरत है। क्योंकि भारत पुलों के निर्माण में समस्याओं का सामना कर रहा है। समय लेने वाली प्रक्रियाओं के चलते अक्सर परियोजनाएं लटक जाती हैं। इन्हें जल्द से जल्द हल किया जाना चाहिए।
नितिन गडकरी ने कहा कि एक धारणा है कि एक बार जो डीपीआर स्वीकृत हो जाती है, उसे पत्थर की लकीर और बाइबिल की तरह माना जाता है। इसलिए हमने बहुत सारी गलतियां की हैं। इसलिए यह सबसे बड़ी समस्या है। सड़क निर्माण का सबसे अच्छा उदाहरण वर्ली सी लिंक है। 26 साल बाद भी इसके जोड़ सही हैं। वहीं सबसे प्रीमियम प्रोजेक्ट द्वारका एक्सप्रेस हाईवे में समस्या है, क्योंकि इसके जोड़ सही नहीं हैं।