मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी का कहना है कि बाल शोषण पीड़ितों को मामला दर्ज करने के लिए 10-15 या उससे ज्यादा सालों का समय दिया जाए। वहीं उन्होंने मी टू कैंपेन का भी समर्थन किया है।
मेनका गांधी ने कहा, 'अब मी टू कैंपेन की शुरुआत हो गई है और मैं बहुत खुश हूं कि यह शुरू हुई। मैं उम्मीद करती हूं कि यह उस तरह से नियंत्रण से बाहर नहीं जाएगा। हम उन लोगों को लक्षित नहीं करेंगे जिन्होंने हमें किसी तरह अपमानित किया है। मुझे लगता है कि महिलाएं जिम्मेदार हैं और यौन शोषण से जुड़ा गुस्सा कभी नहीं जाता है।'
गांधी ने आगे कहा, 'आप हमेशा उस शख्स को याद रखते हैं जिसने उस कृत्य को आपके साथ किया था। हमने
कानून मंत्रालय को लिखा है कि शिकायतें बिना किसी समय अवधि के होनी चाहिए। अब आप 10-15 साल या उसके बाद शिकायत कर सकते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कितने समय बाद। यदि आप शिकायत करने जा रहे हैं तो रास्ता अभी भी खुला हुआ है।'
इससे पहले उन्होंने कहा था कि बाल शोषण की शिकायतों को दर्ज कराने की समय सीमा को बढ़ाया जाएगा ताकि 18 साल का होने के बाद भी पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। पहले तो मंत्रालय ने समय सीमा 7 साल रखने का विचार किया था। लेकिन सभी तरीकों पर काम करने के बाद ही समय सीमा का पता चल पाएगा। यह 7 साल या फिर इससे कम और ज्यादा भी हो सकती है।