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CAA: 14 लोगों को दिए गए सीएए के तहत नागरिकता प्रमाण पत्र, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

Wed, 15 May 2024 04:38 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंत्रालय ने दिया प्रमाणपत्र। - फोटो : ANI
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सीएए को लेकर लोकसभा चुनाव में सियासी वार-पलटवार के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने इसके तहत नागरिकता प्रमाण पत्र का वितरण शुरू कर दिया है। इस कानून के तहत बुधवार को पहली बार केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने दिल्ली में 14 शरणार्थियों को नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपा। इसके साथ ही देश भर के करीब 31 हजार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का सिलसिला शुरू हो गया है।

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गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में सीएए बड़ा मुद्दा है। विपक्षी गठबंधन में शामिल दल न सिर्फ इसका तीखा विरोध कर रहे हैं, बल्कि सत्ता में आने पर इस कानून को खत्म करने का वादा भी कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा सीएए का विरोध करने वाले दलों को हिंदू विरोधी बता कर लगातार पलटवार कर रही है। पार्टी नेता विपक्ष पर मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं।
 
चुनाव के बीच वादा किया पूरा
भाजपा ने इस बार के अपने घोषणा पत्र में सीएए का वादा किया था। करीब दो महीने पहले कानून लागू होने के बाद शरणार्थियों को नागरिकता देने का सिलसिला शुरू कर भाजपा ने बीच चुनाव में ही अपना वादा पूरा कर दिया है।

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) इस साल 11 मार्च को देश में लागू हो गया था। नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। बाद में इस विधेयक को राष्ट्रपति का अनुमोदन मिल गया था। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। 

भरत कुमार का 11 साल का सपना हुआ सच, बोले-भारतीय होना शानदार एहसास
पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आए भरत कुमार का भारतीय नागरिकता पाने के लिए चला लंबा संघर्ष 11 साल के इंतजार के बाद समाप्त हो गया। वह बुधवार को सीएए के जरिये नागरिकता पाने वाले उन 14 लोगों में से एक है। भरत कुमार ने नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद कहा, भारतीय होना एक शानदार एहसास है। इसने मुझे एक नया जीवन दिया है।

भरत कुमार ने कहा, मैं 13 साल का था जब मेरा परिवार धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आया था। वहां दहशत में जीना मुश्किल हो गया था। दिल्ली में, कुमार का परिवार मजनू का टीला इलाके में रहता था और छोटे-मोटे व्यवसाय में लगा हुआ था। उन्होंने कहा कि बुधवार को उनके इलाके में कुल पांच लोगों को भारतीय नागरिकता मिली, जबकि सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था। बाकी आवेदकों को भी उचित समय पर नागरिकता मिलेगी। भरत ने कहा कि भारतीय नागरिकता मिलना सपने के सच होने जैसा है। मजनू का टीला में ही रहने वाले शीतल दास ने कहा कि उनका 19 लोगों का परिवार भी 2013 में पाकिस्तान के सिंध से आया था। उनमें से तीन को नागरिकता मिल गई। मैं बहुत खुश हूं। सरकार ने हमारी इच्छा पूरी कर दी है। अब मैं भारत में सम्मानजनक जीवन जी सकता हूं।




सीएए को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करने के लिए दिसंबर 2019 में अधिनियमित किया गया था, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे।  नागरिकता अधिनियम में देशीयकरण द्वारा नागरिकता का प्रावधान किया गया है। आवेदक को पिछले 12 महीनों के दौरान और पिछले 14 वर्षों में से आखिरी साल 11 महीने भारत में रहना चाहिए। कानून में छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) और तीन देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) से संबंधित व्यक्तियों के लिए 11 वर्ष की जगह छह वर्ष तक का समय है। 
 
कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी नियम का उल्लंघन किया जाता है तो ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

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