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Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि दी, उनकी तीन बातों का दिलाया याद

Sat, 29 Jul 2023 10:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गृह मंत्री अमित शाह। फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की। यहां उन्होंने 'डॉ एपीजे अब्दुल कलाम: मेमोरीज नेवर डाई' पुस्तक का विमोचन किया। 

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इस दौरान अमित शाह ने कहा कि 'इंडिया 2020: विजन फॉर द न्यू मिलेनियम' पुस्तक में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के विकास के रोडमैप को रेखांकित करने का काम किया। उन्होंने प्रमुख रूप से तीन बातें कहीं- भारत को अपनी क्षमता पहचानना होगा, प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करना होगा और कृषि-उद्योग तथा शहर-गांव के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारे छात्रों और उनके स्टार्टअप के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में अवसर खुले हैं। मेरा मानना है कि एपीजे अब्दुल कलाम का अंतरिक्ष विज्ञान का सपना पीएम मोदी के नए नवाचारों के कारण पूरा होगा और भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में पूरे विश्व का नेतृत्व करेगा।
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शाह ने कहा, डॉक्टर कलाम ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो नींव डाली, आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने 55 अंतरिक्ष यान, 50 प्रक्षेपण यान, 11 छात्र उपग्रह प्रक्षेपित किए। देश ने 104 उपग्रह एक साथ छोड़ने जैसी सिद्धियां भी हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में देश के युवाओं और नए स्टार्टअप्स के लिए द्वार खुले हैं। 'डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, मेमोरीज नेवर डाई' पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए डॉ. कलाम की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उनकी सराहना की। डॉ. कलाम की जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम ने शुरुआत समाचार पत्र बेचने से की थी, लेकिन बाद में अपने कार्यों से उन्होंने प्रसिद्धि प्राप्त की और देश में सर्वोच्च पद भी पहुंचे। उन्होंने कहा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को एक नई दिशा देने के लिए इतिहास में भारतरत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

शाह ने यहां शुक्रवार को एक रैली को भी संबोधित किया और भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के अन्नामलाई की राज्य भर के लिए पदयात्रा 'एन मन एन मक्कल' (मेरी भूमि, मेरे लोग) को रवाना किया। रामेश्वरम दिवंगत राष्ट्रपति कलाम (1931–2015) का गृह स्थान है।

राष्ट्रपति भवन में अतिथियों का खर्च उठाते थे कलाम
पूर्व राष्ट्रपति कलाम के सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि जब कलाम राष्ट्रपति थे, तब एक बार कुछ लोग नौ दिन तक राष्ट्रपति भवन में रुके थे। राष्ट्रपति ने उनके रुकने के खर्च को खुद वहन किया और सरकार को 9.52 लाख रुपये दिए थे। हालांकि नियम के मुताबिक वे लोग सरकारी अतिथि थे।  

दो सूटकेस लेकर राष्ट्रपति भवन आए और वही लेकर लौटे
शाह ने कहा, कलाम ने अपने कार्यों से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी का परिचय दिया और यही बात बताती है कि लोग उन्हें 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में याद करते हैं। उनकी विनम्रता की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि कलाम एकमात्र व्यक्ति थे, जो राष्ट्रपति के रूप में केवल दो सूटकेस के साथ राष्ट्रपति भवन में प्रवेश किया और पद छोड़ने के बाद बिल्कुल उसी तरह घर गए थे।

अग्नि की सफल लॉन्चिंग पूरे विश्व में भारत की मिसाइल ताकत का परिचायक बन गई
शाह ने कहा कि अग्नि मिसाइल के पहले लांच को कुछ दिक्कतों के चलते जब दो-तीन बार स्थगित करना पड़ा, तब पूरी टीम में निराशा छा गई। मगर डॉक्टर कलाम ने उनका उत्साहवर्धन किया और मिसाइल लॉन्चिंग के स्थान पर डेढ़ महीने तक रुक कर रात-रात भर काम किया। बाद में सफल लॉन्चिंग के बाद अग्नि मिसाइल समग्र विश्व में भारत की मिसाइल ताकत की एक परिचायक बन गई। उन्होंने कहा कि डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में देश में पांच मिसाइलों को लेकर बड़ा काम हुआ। पृथ्वी, अग्नि, आकाश, नाग और त्रिशूल मिसाइल के नाम से पता चलता है कि डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम प्रकृति और अध्यात्म से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि एक वैज्ञानिक तभी विश्व के कल्याण का काम कर सकता है जब उसकी आत्मा विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म से भी जुड़ी हो।

पूर्व राष्ट्रपति कलाम और पीएम मोदी ने देश के गरीबों को लोकतंत्र के केंद्र में लाने का काम किया
शाह ने कहा कि डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति रहते हुए लोकतंत्र के केंद्र में भारत के आम नागरिक को लाने का काम किया है और आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को लोकतंत्र के केंद्र में लाने में सफल हुए हैं। ये इस बात का द्योतक है कि जब जमीन से उठा हुआ गरीब व्यक्ति लोकतंत्र के शिखर पर पहुंचता है तब लोकतंत्र गरीबों को समर्पित होता है और उनका विकास व कल्याण करने वाला होता है।

रामेश्वरम सनातन संस्कृति की प्राचीनता और वैभव का प्रतीक
केंद्रीय मंत्री विश्व प्रसिद्ध रामेश्वरम मंदिर में पूजा अर्चना भी की। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, रामेश्वरम मंदिर सनातन संस्कृति की प्राचीनता और वैभव का अक्षुण्ण प्रतीक है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री रामेश्वरम में प्रभु श्री राम ने भगवान शिव की पूजा की थी। आज 'आदि थिरुविजहा' के शुभ अवसर पर यहां दर्शन कर अत्यंत सुखद व परम सौभाग्य की अनुभूति हो रही है। भोलेनाथ से देशवासियों की खुशहाली और राष्ट्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। गृह मंत्री ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हाउस, मिशन ऑफ लाइफ गैलरी म्यूजियम और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम नेशनल मेमोरियल का दौरा किया। साथ ही वे विवेकानंद मेमोरियल भी गए।
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