केंद्र सरकार के बफर स्टॉक के लिए गेहूं खरीदी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसमें लगातारी तीसरे साल भी सरकार अपना तय लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी है। सरकार ने 2024 के लिए 372.9 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन सरकार अपने लक्ष्य से 107 टन अभी पीछे है। इसके पीछे का सबसे कारण यह है कि देश के एक भी राज्य ने अपना टारगेट पूरा नहीं किया है। केंद्र को इस साल सबसे ज्यादा झटका भाडपा के शासन वाले उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश ने दिया है। मध्यप्रदेश अपने गेहूं खरीद लक्ष्य से 32 लाख तो उत्तर प्रदेश 50 लाख टन पीछे रहा है।
जानकारों का कहना है कि इस साल भी किसानों ने सरकारी एजेंसियों को ज्यादा गेहूं नहीं बेचा है। क्योंकि उन्हें खुले बाजार में ज्यादा भाव मिल रहा था। इस वर्ष 37,05,051 लाख किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन करवाया था। इसमें से 21,03,356 लाख किसानों ने ही सरकार को अपनी उपज बेची है। बचे हुए किसानों ने या तो गेहूं को व्यापारियों को बेच दिया या फिर भविष्य में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में अपने पास स्टोर किया। क्योंकि इस साल सरकार 2275 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर गेहूं खरीद रही थी, जबकि ओपन मार्केट में किसानों को 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक का रेट मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश में देश का करीब 33 फीसदी गेहूं पैदा होता है। यह सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। इस साल यूपी से सिर्फ 9.28 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया है। जबकि टारगेट 60 लाख टन का था। यानी यूपी में टारगेट का मात्र 15.46 फीसदी गेहूं ही खरीदा गया। इसी तरह मध्यप्रदेश में देश का लगभग 20 फीसदी गेहूं पैदा होता है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। यहां इस साल मात्र 48.39 लाख टन की ही खरीद हो पाई है, जबकि 80 लाख टन का टारगेट दिया गया था। केंद्रीय कृषि मंत्री के राज्य से ही केंद्र द्वारा दिए गए टारगेट का महज 60.48 फीसदी ही खरीद हुई है।
देश का तीसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक पंजाब है। गेहूं उत्पादन में इसकी भागीदार सिर्फ 15 फीसदी है। इसके बावजूद देश में सबसे ज्यादा 124.55 लाख टन की खरीद की है। यहां पर 130 लाख टन के खरीद का टारगेट दिया गया था। यहां टारगेट का 95.8 फीसदी गेहूं खरीदा गया है। चौथे स्थान पर हरियाणा का नंबर आता है।
हरियाणा 10.5 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ देश का चौथा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है। यहां पर इस साल 71.15 लाख टन की खरीद हुई है। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी खरीद है। केंद्र ने हरियाणा को 80 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया था। यहां पर 88.9 फीसदी खरीद हुई है। राजस्थान देश का पांचवां सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है, जिसकी कुल उत्पादन में 9.7 फीसदी की हिस्सेदारी हैं। यहां पर 12 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद हुई है। जबकि 20 लाख टन का टारगेट दिया गया था। इस तरह राजस्थान में लक्ष्य का 60 फीसदी गेहूं खरीदा गया है। छठे स्थान पर बिहार का नंबर आता हैं। इस साल 2 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का टारगेट रखा गया था, जबकि महज 10118.5 टन की ही खरीद हुई है।
लगातार तीसरे साल मिली नाकामी
केंद्र सरकार के मुद्दे केंद्र सरकार लगातार तीसरे साल अपने लक्ष्य से पीछे रह गई है। पिछले साल यानी रबी मार्केटिंग सीजन 2023-24 में सरकार ने 341.50 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था। लेकिन पूरी खरीद सिर्फ 262 लाख मीट्रिक टन पर ही सिमट कर रह गई थी। वर्ष 2022-23 में सरकार ने 444 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था। बाद में सरकार को अपना खरीद लक्ष्य संशोधित करके 195 लाख टन करना पड़ा। संशोधित लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ और देश में गेहूं की पूरी खरीद महज 187.9 लाख मीट्रिक टन पर ही सिमट गई थी। इस साल यानी 2024-25 में भी सरकार अपने लक्ष्य से पीछे रह गई है। सरकार टारगेट का 71.1 फीसदी ही गेहूं खरीद कर पाई है।