केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की वापसी पर बात की। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है, ऐसे में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की वापसी पर फैसला संबंधित राज्य सरकारों की ओर से ही लिया जाएगा। केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। तोमर ने किसान आंदोलन की समाप्ति के फैसले का भी स्वागत किया।
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर चले आंदोलन की अगुवाई करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने गुरुवार को आंदोलन समाप्ति का एलान किया था। मोर्चा ने यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से एक औपचारिक पत्र मिलने के बाद लिया जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी समेत अन्य मांगें स्वीकार की गई थीं। बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के 40 संगठनों से मिलकर बना है।
'कानूनों की वापसी किसी की हार-जीत का मामला नहीं'
मोर्चा को केंद्र की ओर से भेजे गए पत्र में सरकार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तत्काल प्रभाव से किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के लिए सहमत हुए हैं। इसमें कहा गया है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में भी ये मामले वापस होंगे। तोमर ने कहा, मैं एक साल से अधिक समय से किसान नेताओं के संपर्क में हूं। मैंने उनसे आज सुबह भी बात की थी। यह किसी की हार-जीत का मामला नहीं है और इसे ऐसे नहीं देखा जाना चाहिए।
'किसानों ने किया प्रधानमंत्री मोदी के फैसले का स्वागत'
किसानों के आंदोलन पर फैसला लेने में हो रही देरी को लेकर एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है और यह बात सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि सभी किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय का स्वागत किया है, जिसने किसानों के सम्मान को सुनिश्चित किया है। अब किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है और अपने घर लौट रहे हैं। बीती 29 नवंबर को इन तीनों कानूनों की वापसी को लेकर एक विधेयक संसद में पारित हुआ था।