यूनिफॉर्म वितरण में हुआ घोटाला
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पिछले शिक्षण सत्र में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों में यूनिफार्म के वितरण में जमकर धांधली किए जाने का मामला सामने आया है। नोडल अफसरों से कराई गई जांच में वास्तविक छात्र संख्या के सापेक्ष 30 फीसदी अधिक बच्चों के नाम से यूनिफार्म वितरण दिखाने के खुलासे के बाद शुक्रवार को डीएम ने जिले के 1143 प्रधानाध्यापकों से करीब सवा दो करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश दिया है। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को दो-दो सेट यूनिफार्म दिए गए थे। कुल करीब पौने दो लाख बच्चों को यूनिफार्म वितरण पर सात करोड़ रुपए खर्च हुए थे। यूनिफार्म मामला शुरुआत से ही विवाद में घिर गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर 80 नोडल अफसरों ने यूनिफार्म की गुणवत्ता की जांच की थी। बाद में जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने स्वयं गोपीगंज और सुरियावां के कुछ विद्यालयों की जांच की तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सामने आई।
र माह पूर्व डीएम ने बच्चों की वास्तविक उपस्थिति की जांच के लिए 80 नोडल अफसरों को लगाया। शुक्रवार को नोडल अफसरों ने जांच रिपोर्ट सौंपी तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। तकरीबन सभी स्कूलों में बच्चों की फर्जी उपस्थिति की बात सामने आई है। इस पर डीएम ने सभी स्कूलों के हेडमास्टर से एक हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक की रिकवरी का निर्देश दिया है।
जिन स्कूलों में गड़बड़ी मिली है, वहां के हेडमास्टरों से रिकवरी कराई जाएगी। - डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।